राजस्थान में जल जीवन मिशन पर सवाल: कागजों में हर घर जल, हकीकत में बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीण
Sunday, May 24, 2026-04:17 PM (IST)
झालवाड़। राजस्थान में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में कागजों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने का दावा किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विधानसभा क्षेत्र रायपुर तहसील के पालखंदा गांव सहित कई इलाकों में ग्रामीण आज भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
सरकारी रिकॉर्ड में इन गांवों को “हर घर जल” योजना के तहत पूर्ण रूप से कवर बताया गया है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पालखंदा गांव में 178 में से 173 परिवारों को नल कनेक्शन दिए जा चुके हैं और नियमित जलापूर्ति भी दिखाई गई है। लेकिन गांव में पहुंचने पर तस्वीर कुछ और ही दिखाई देती है। कई घरों में पाइप लाइन तो बिछी हुई है, लेकिन नलों में आज तक पानी की एक बूंद नहीं आई।
ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक उन्होंने अपने घरों के नलों में पानी नहीं देखा। गांव की महिलाएं आज भी करीब एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पीने का पानी लाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि सरकार के दावों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। महिलाओं ने यह भी कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से उनका वर्षों पुराना संबंध है, लेकिन इसके बावजूद गांव में पानी की समस्या दूर नहीं हो सकी।
गांव में जगह-जगह निम्न गुणवत्ता वाली प्लास्टिक पाइप लाइनें बिछी दिखाई देती हैं, जो कई स्थानों से टूटी हुई हैं। कई घरों में नलों पर टोटियां तक नहीं लगाई गईं। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों ने अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया निर्माण कार्य कर बिना जलापूर्ति शुरू किए ही कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र हासिल कर लिए।
उपखंड अधिकारी ने कहा कि विभागीय रिपोर्ट में जलापूर्ति दिखाई गई है, लेकिन ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए प्रशासन दो टैंकरों से पानी उपलब्ध करवाएगा। वहीं अधिशासी अभियंता गौतम ने दावा किया कि सड़क निर्माण के दौरान पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसे जल्द ठीक कर एक सप्ताह में पानी सप्लाई शुरू कर दी जाएगी।
गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने क्षेत्र के दौरे के दौरान जल जीवन मिशन में गड़बड़ियों पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता दीपक कुमार झा को लापरवाही और खराब मॉनिटरिंग के आरोप में एपीओ किया गया था।
