राजनीति, धरातल पर जनहित से कांग्रेसियों का कोई वास्ता नहीं: मदन राठौड़

Friday, Apr 03, 2026-05:50 PM (IST)

जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने विपक्ष की अनर्गन बयानबाजी पर तिखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा जलेबी रेस में दौड़ रहे है, हर कोई अवसर लपकने के लिए जल्दी में है। गहलोत साहब तीन बार के सीएम रहे, अब उनके पास कोई कार्य नहीं है, इसलिए मनोरंजन के लिए वे सोशल मीडिया पर सीरीज चला रहे है। गहलोत जी को कहीं ना कहीं तो मन लगाना ही पड़ेगा। इसलिए व्यस्तता दिखाने के लिए ट्विट कर रहे है। वे हर कहीं फायदा देखते है, जबकि हर कहीं फायदा खोजना ठीक नहीं है। उन्हें जनहित के काम देखने चाहिए। गहलोत साहब की शब्दावली आजकल गंभीरता पूर्ण नहीं रही, उनके बोल बिगड़ते जा रहे है।  

मनसा द्वारा किए जा रहे कार्यक्रम का विरोध कर रहे 
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस के पास अब कोई कार्य नहीं बचा, इसलिए अनुमति लेकर मनसा द्वारा किए जा रहे कार्यक्रम का वे विरोध कर रहे है। डोटासरा जैसे वरिष्ठ व्यक्ति इसका विरोध कर रहे है। ऐसे में स्पष्ट है कि डोटासरा अब सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के कार्य कर रहे है। अब वे हर कार्य में नुक्ताचीनी कर रहे है, उनका यह अमर्यादित व्यवहार है। महिलाएं अनुमति लेकर कार्य नहीं करेगी क्या! जब वे  एक कॉलेज में मणिशंकर अय्यर को लेकर कार्यक्रम करते है तो उनकी पीठ थपथपाई जाती है, वहीं महिलाएं कार्यक्रम करें तो विरोध, कांग्रेस का यह दोहरा चरित्र सही नहीं है। उन्होंने कहा कि क्या महिलाओं के एक सकारात्मक सामाजिक कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़कर फर्जी पोस्टर फैलाना और उसके आधार पर विरोध करना, एनएसयूआई नेताओं की नई राजनीति बन गई है? क्या यह कदम अपने अध्यक्ष विनोद जाखड़ की कार्यशैली को दोहराने की कोशिश है? और सबसे बड़ा सवाल यह है क्या अब एनएसयूआई में पद पाने की एकमात्र योग्यता केवल आरएसएस का विरोध और भ्रामक नैरेटिव खड़ा करना ही रह गया है? महिला सशक्तिकरण जैसे गंभीर विषय को भी राजनीतिक स्वार्थ की भेंट चढ़ाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। 

धरातल पर उतर कर संगठन को मजबूत करें कांग्रेस के नेता
राठौड़ ने कहा कि डोटासरा जी को डर सता रहा है कि कहीं जूली उनसे आगे नहीं निकल जाए। कांग्रेस में आजकल टीकाराम जूली को महत्व दिया जा रहा है, ऐसे में डोटासरा जी को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है। वहीं गहलोत साहब को लग रहा है कि उनके साथ जूली, डोटासरा भी मुंगेरी लाल के सपने देख रहे है, ऐसे में ये तीनों जलेबी रेस में आ गए। ये धरातल पर संगठन को सुदृढ़ करने की बजाय उपरीतौर पर राजनीति दिखा रहे है। इनके बयानों को देखते हुए स्पष्ट हो गया है कि आजकल की राजनीति वक्तव्य की राजनीति रह गई, स्टेटमेंट की राजनीति रह गई, ट्विट की राजनीति रह गई, सोशल मीडिया की राजनीति रह गई। इन कांग्रेसी नेताओं को चाहिए कि वे धरातल पर उतर कर संगठन को मजबूत करें, लोकतंत्र को मंजबूत करें। भाजपा लोकतंत्र के समर्थन में है और लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष होना चाहिए। विपक्ष तब ही मजबूत होगा, जब ये परिवारवाद से निकलेंगे, नहीं तो कांग्रेस की दुर्गती साफ है। वे बंगाल में साफ, पंजाब में साफ, बिहार में साफ, तमिलनाडु में साफ, केरल में साफ हो रहे है।  

महिला आरक्षण के मुद्दे पर सवाल उठाना नादानी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि यह विधेयक लोकसभा में सर्वसम्मति से पारित हुआ है, जिसमें कांग्रेस भी शामिल थी। अब उसी पर सवाल उठाना नादानी है। अब इस बिल पर सवाल उठाना बचकानी हरकते है। अब इसका विरोध करने का क्या मतलब है। कांग्रेस स्पष्ट करें कि क्या वे महिला विरोधी है! कांग्रेस स्पष्ट करें कि वे महिलाओं को आगे लाना चाहते है या नहीं। कांग्रेस को इस बिल से शायद अपनी जमीन खिसकने का डर सता रहा है, इसलिए वो बैकडोर से इसका विरोध कर रही है, जिसे देश की महिलाएं कभी स्वीकार नहीं करेंगी। लोकसभा में जब यह बिल सर्व सम्मति से पारित हुआ तब उनके नेता कहां थे, विदेश घुमने के लिए गए होंगे, इसलिए उनको पता नहीं है। लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पर बहस होनी है, इसलिए कांग्रेस को अदृष्य डर सता रहा है। 


Content Editor

Anil Jangid

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