जैसलमेर में बीजेपी ने विजय डांगरा पर खेला दांव, अरुण पुरोहित को नहीं मिला सभापति का टिकट

Thursday, Sep 17, 2026-06:53 PM (IST)

जैसलमेर: जैसलमेर नगर परिषद चुनाव के परिणाम सामने आने के बाद अब सभापति पद को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। 45 सदस्यीय नगर परिषद में 25 पार्षदों के साथ बहुमत हासिल करने वाली बीजेपी ने सभापति पद के लिए विजय डांगरा के नाम पर मुहर लगा दी है। वहीं, लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय अरुण पुरोहित को टिकट नहीं मिला। अब सभापति पद के लिए बीजेपी के विजय डांगरा और कांग्रेस के निर्मल रैयानी के बीच मुकाबला होगा।

 

नगर परिषद चुनाव के नतीजों के बाद से ही बीजेपी के सभापति उम्मीदवार को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज थी। पार्टी के भीतर विजय डांगरा और अरुण पुरोहित के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे थे। चुनाव में बीजेपी ने 25 वार्डों में जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 16 सीटें मिलीं। चार निर्दलीय पार्षद भी चुनाव जीतने में सफल रहे। बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण बोर्ड गठन की स्थिति पहले ही साफ हो गई थी। इसके बाद सभी की नजर सभापति पद के उम्मीदवार पर थी।

 

पार्टी ने अंतिम समय तक अपना फैसला सार्वजनिक नहीं किया। नामांकन के अंतिम दिन विजय डांगरा और अरुण पुरोहित दोनों के नाम से बीजेपी के फॉर्म जमा करवाए गए। इसके बाद पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के नाम वाले सिंबल लिफाफे को लेकर सस्पेंस बना रहा। आज सुबह उपखंड अधिकारी की ओर से सिंबल का लिफाफा खोला गया तो उसमें विजय डांगरा का नाम सामने आया। इसके साथ ही बीजेपी के सभापति उम्मीदवार को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया।

 

अरुण पुरोहित लंबे समय से बीजेपी संगठन से जुड़े हुए हैं और वर्तमान में पार्टी के नगर अध्यक्ष भी हैं। उनके समर्थकों की ओर से यह बात कही जा रही थी कि संगठन के लिए लंबे समय से काम करने वाले स्थानीय कार्यकर्ता को सभापति पद का मौका मिलना चाहिए। टिकट नहीं मिलने के बाद उनके समर्थकों के बीच निराशा की चर्चा है।

 

वहीं विजय डांगरा कारोबारी और उद्योग जगत से जुड़े व्यक्ति बताए जाते हैं। उनके नाम की घोषणा के बाद जैसलमेर के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बीजेपी के फैसले को लेकर अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि पार्टी ने संगठन के पुराने कार्यकर्ता के बजाय कारोबारी पृष्ठभूमि वाले चेहरे को प्राथमिकता दी है। हालांकि, टिकट देने के फैसले में आर्थिक प्रभाव की भूमिका रही, इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 

अरुण पुरोहित के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के करीबी होने की चर्चा भी स्थानीय राजनीतिक हलकों में होती रही है। इसके बावजूद उन्हें सभापति पद का टिकट नहीं मिला। हालांकि, पार्टी ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि विजय डांगरा को उम्मीदवार बनाए जाने के पीछे क्या प्रमुख कारण रहे।

 

इस फैसले के बाद सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इस घटनाक्रम की तुलना वर्ष 2004 के नगर परिषद चुनाव से कर रहे हैं। उस समय हरिकिशन व्यास उर्फ दल्ला भा के नाम पर चुनाव लड़ने और बाद में अध्यक्ष पद पर गोपीकिशन मेहरा को मौका मिलने की चर्चा की जाती है। हालांकि, पुराने घटनाक्रम और मौजूदा राजनीतिक फैसले के बीच समानता को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है।

 

अब सभापति पद के लिए बीजेपी के विजय डांगरा का मुकाबला कांग्रेस के निर्मल रैयानी से होगा। नगर परिषद में बीजेपी के पास 25 पार्षदों का स्पष्ट बहुमत है, जबकि कांग्रेस के 16 और निर्दलीय 4 पार्षद हैं। ऐसे में चुनाव से पहले संख्याबल बीजेपी के पक्ष में है। हालांकि, सभापति पद का आधिकारिक परिणाम मतदान और निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही घोषित होगा।

 

जैसलमेर नगर परिषद की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीजेपी के सभी पार्षद पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के साथ किस तरह खड़े रहते हैं। दूसरी ओर कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका पर भी नजर रहेगी। फिलहाल बीजेपी ने विजय डांगरा को मैदान में उतारकर सभापति पद को लेकर चल रहे सस्पेंस को खत्म कर दिया है। वहीं, अरुण पुरोहित को टिकट नहीं मिलने के बाद पार्टी के अंदर और स्थानीय स्तर पर इस फैसले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।


Content Editor

Anil Jangid

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