महात्मा गांधी के रचनात्मक विचारों को संवेदनशीलता से पूरा करने की जरूरत- डॉ. संदीप दीक्षित

Thursday, May 07, 2026-07:17 PM (IST)

जयपुर। पूर्व सांसद डॉ. संदीप दीक्षित ने महात्मा गांधी के जीवन दर्शन पर आधारित समाजोपयोगी रचनात्मक विचारों और कार्यक्रमों को संवेदनशीलता से पूरा करने पर जोर दिया है।

डॉ. दीक्षित ने गुरुवार को भारत सेवा संस्थान एवं महात्मा गांधी जीवन दर्शन संस्थान द्वारा आयोजित "रचनात्मक कांग्रेस" विषयक संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में  संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में इस बात की अत्यधिक आवश्यकता है कि रचनात्मक कार्यक्रमों को संवेदनशीलता, सामाजिक समरसता एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ विभिन्न समुदायों और सभी वर्गों के हितों का पूरा ध्यान रख कर लागू किया जाए।

संगोष्ठी के आरम्भ में राजस्थान लोकसेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष बीएम शर्मा ने संस्थान की गतिविधियों का परिचय दिया। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों को सभी के बीच रखने की जरूरत को बताते हुए उनके अनुरूप नवसृजन की ओर बढ़ने का आग्रह किया। 

सत्र में वैभव गहलोत ने रचनात्मक विचारों के रूप में संस्थान द्वारा चलाए गए 'अरावली बचाओ अभियान' का उदाहरण दिया। उन्होंने सामाजिक सुधार के पहलुओं से जुड़ने के लिए इसी प्रकार के नवाचारों पर ध्यान देने की आवश्यकता प्रतिपादित की। संगोष्ठी में जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुनील शर्मा ने महात्मा गांधी के दर्शन और नेहरू के सपनों के का भारत का जिक्र करते हुए आज की युवा पीढ़ी को उन्हें आत्मसात करने पर जोर दिया। 

संगोष्ठी को समग्र सेवा संघ के अध्यक्ष सवाई सिंह, पीसी जैन, भागचंद मीणा, समग्र सेवा संस्थान के अध्यक्ष सवाई सिंह सहित पी सी जैन, भागचंद मीणा, भूपेंद्र आर्य, संत कुमार जैन, विवेक शर्मा, विक्की टिक्कीवाल, कुसुम जैन, जय नारायण सैनी, धर्मेंद्र जाटव, राम सिंह, मीनाक्षी शेट्टी, हितेश मोटवानी, रामफूल गुर्जर, पुष्पेंद्र सिंह, जिज्ञासा जैन, रोहित शर्मा और रामचंद्र जांगिड़ इत्यादि ने संबोधित किया। सभी ने रचनात्मक कांग्रेस पर महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। 

अंत में भारत सेवा संस्थान की ओर से एस एस जोशी ने मुख्य अतिथि एवं अन्य सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए इस तरह की संगोष्ठी भविष्य में भी आयोजित करते रहने का संकल्प जताया। डॉ. दीक्षित ने संस्थान परिसर में पद्मश्री डी आर मेहता से भी मुलाकात की।
  


Content Editor

Ishika Jain

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