ईसरदा बांध परियोजना में तेजी: मुख्य सचिव ने टीना डाबी के साथ किया निरीक्षण
Saturday, Apr 11, 2026-04:49 PM (IST)
टोंक। पूर्वी राजस्थान की बहुप्रतीक्षित ईसरदा बांध परियोजना को समय सीमा में पूरा करने के उद्देश्य से सरकार ने अपनी निगरानी और गति दोनों बढ़ा दी है। इसी क्रम में शनिवार को प्रदेश के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने टोंक जिले का दौरा कर बनास नदी पर निर्माणाधीन ईसरदा बांध परियोजना का जमीनी स्तर पर निरीक्षण किया। इस दौरान टोंक की नवनियुक्त जिला कलेक्टर टीना डाबी भी उनके साथ मौजूद रहीं।
मुख्य सचिव के परियोजना स्थल पर पहुंचने पर अधिकारियों द्वारा उनका स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने सवाई माधोपुर और टोंक जिलों के कलेक्टरों के साथ बैठक कर परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति, तकनीकी चुनौतियों और प्रशासनिक बाधाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव सीधे बांध निर्माण स्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने कंक्रीट कार्य, पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया और अन्य निर्माण गतिविधियों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने परियोजना अभियंताओं को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं ताकि क्षेत्र के लोगों को जल्द से जल्द पेयजल सुविधा मिल सके।
इस निरीक्षण के बाद परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर उम्मीदें और बढ़ गई हैं। माना जा रहा है कि ईसरदा बांध परियोजना के पूरा होने के बाद टोंक, सवाई माधोपुर और दौसा जिलों के हजारों गांवों को पेयजल संकट से बड़ी राहत मिलेगी।
परियोजना के तहत बनास नदी के पानी को संग्रहित कर 225 एमएलडी क्षमता का वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही सैकड़ों किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सकेगा।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस योजना से दौसा जिले के लगभग 1,000 गांवों और सवाई माधोपुर के शुरुआती चरण में 177 गांवों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। परियोजना पूरी होने पर लगभग 1200 गांवों तक “हर घर जल” का लक्ष्य पूरा करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
ईसरदा बांध परियोजना को पूर्वी राजस्थान के जल संकट के स्थायी समाधान के रूप में देखा जा रहा है और सरकार इसे तय समय में पूरा करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग कर रही है।
