रणथम्भौर में दुर्लभ कैराकल को बचाने की पहल | विशेषज्ञों ने बनाई संरक्षण रणनीति

Thursday, Apr 16, 2026-12:11 PM (IST)

सवाईमाधोपुर | दुर्लभ वन्यजीव कैराकल के संरक्षण को लेकर बुधवार को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में कैराकल संरक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। राजस्थान वन विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में देशभर के वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और संस्थानों के प्रतिनिधि जुटे। कार्यक्रम का उद्घाटन भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक जेएस भारद्वाज और राजस्थान के मुख्य वन्यजीव संरक्षक केके अरुण प्रसाद ने किया। इस अवसर पर प्रमुख अन्वेषक डॉ. शोमिता मुखर्जी, सह-अन्वेषक डॉ. अयन साहू और डॉ. धर्मेंद्र खंडाल ने कोरकल पक्षी की वर्तमान स्थिति, वितरण और जनसंख्या पर विस्तृत जानकारी दी। 

ए​शिया के जंगलों में पाई जाने वाली महत्वपूर्ण प्रजाति 
डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि कैराकल राजस्थान के कुछ क्षेत्रों सहित ए​शियाई जंगलों में पाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण वन्यजीव प्रजाति है। फिलहाल इसे राजस्थान के रणथम्भौर सहित करौली एवं जैसलमेर के जंगलों में देखा गया है। कार्यशाला में कैराकल के रणथम्भौर के अलावा मुकुंदरा ​हिल्स एवं रामगढ विषधारी टाइगर रिजर्व जैसे क्षेत्रों में संरक्षण को लेकर चर्चा की गई। वन्यजीव विशेषज्ञों ने कहा कि इसके संरक्षण के लिए आवास की पहचान, निगरानी प्रणाली, शोध ढांचे को मजबूत करना और स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है। विशेषज्ञों ने कहा कि कैराकल संरक्षण रणनीति तैयार करने में यह आयोजन मील का पत्थर साबित होगा।

 


Content Editor

Kuldeep Kundara

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