वनस्थली विद्यापीठ में हुआ प्री कॉन्फेस वुमेन थॉट लीडर "भारतीय नारी टू नारायणी" का आयोजन
Sunday, Mar 08, 2026-12:42 PM (IST)
जयपुर। वनस्थली विद्यापीठ के समाजशास्त्र विभाग द्वारा भारतीय विद्वत परिषद एवं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के तत्वाधान में प्री कॉन्फेस वुमेन थॉट लीडर "भारतीय नारी टू नारायणी" का आयोजन किया गया। इस कॉन्फेस का उद्देश्य महिलाओं के सामाजिक और राष्टीय योगदान को उजागर करना और उन्हे समाज एवं राष्ट के विकास में सक्रिय नेत्तृव के रूप में प्रस्तुत करना था।
सड़क दुघर्टना पीड़ितो की सेवा का अनुभव साझा किया
कॉन्फेस का आयोजन वनस्थली विद्यापीठ के कुलपति प्रो. ईना आदित्य शास्त्री के मार्गनिर्देशन में हुआ। कॉन्फेस की मुख्य अथिति पद्म श्री अवार्ड से सम्मानित प्रो. माया टंडन ने अपने प्रेरक सम्बोधन में तीन दशको से अधिक समय तक सड़क दुघर्टना पीड़ितो की सेवा का अनुभव साझा करते हुये समाज सेवा और समय पर चिकित्सीय देखभाल को रेखांकित किया।
कॉन्फेस का आकर्षण पेनल चर्चा रही
प्रो. डॉ. माया टंडन ने छात्राओं से कहा कि वनस्थली विद्यापीठ जैसी प्रतिष्ठित संस्था उन्हें शिक्षा का सर्वोतम उपयोग करने, आत्मविश्वास विकसित करने और समाज एवं राष्ट्र के कल्याण में योगदान देने का अवसर देती है। मुख्य वक्ता प्रो. अर्चना कोशिक, दिल्ली विश्वविद्यालय ने महिलाओं के सशक्तिकरण और नेतृत्व पर गहन विचार साझा किये। उन्होंने महिलाओं की मौन शक्ति को सामाजिक परिवर्तन में उपयोग करने की आवश्यकता पर बल दिया। कॉन्फेस का आकर्षण पेनल चर्चा रही।
कार्यक्रम अंतरमुखी और समावेशी रहा
पेनल चर्चा में एयर कमोडोर देवेंद्र सिंह शेखावत, प्रो. अजय सुराणा, प्रो. मोनिका जैन, प्रो. सृष्टि, प्रो. माण्डवी, प्रो. हम्सा वाहिनी, चिकित्सा अधिकारी डॉ. नीरा सिंह, प्रो. अंकुर जोशी, प्रो. आशा रावत आदि ने कॉन्फेस थीम विद्या, शक्ति, मुक्ति, चेतना, प्रकृति, संस्कृति, सिद्धि, कृति, पर विस्तारपूवर्क चर्चा की। प्रतिभागियो के सक्रिय संवाद ने कार्यक्रम को अंतरमुखी और समावेशी बनाया।
वैदिक काल की महिलाओं की चर्चा
कॉन्फेस के समन्वयक वनस्थली विद्यापीठ के समाज विज्ञान संकाय के डीन प्रो. हितेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि महिलाएं समाज को बेहतर भविष्य की और ले जाते हुये सन्तुलन और सामंजस्य स्थापित करने की असाधारण क्षमता रखती हैं, जो विकसीत भारत 2047 के लक्ष्य प्राप्त करने में सहायक होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिये समावेशी मंच का निर्माण, जो उनकी आत्मनिर्भरता की यात्रा को बढ़ावा दे। उन्होंने वैदिक काल की महिलाओं गार्गी मैत्रीय लोपामुद्रा के बारे में चर्चा कर प्रतिभागीयों को कहा की भारतीय ज्ञान प्रणाली से सभी को अवगत करायें। कॉन्फेस में 200 से अधिक प्रतिभागियो ने भाग लिया।
