राजस्थान में पहाड़ चीरकर बन रही देश की सबसे बड़ी वाटर टनल, हजारों गांवों को मिलेगा पानी
Thursday, Mar 05, 2026-06:11 PM (IST)
बारां। राजस्थान में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य में पहाड़ को चीरकर देश की सबसे बड़ी वाटर टनल बनाई जा रही है, जिससे हजारों गांवों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। यह टनल परवन-अकावद वृहद पेयजल परियोजना के तहत तैयार की जा रही है और इसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
जानकारी के अनुसार, सात मार्च को एयरपोर्ट के पास नौनेरा वृहद पेयजल परियोजना और परवन-अकावद वृहद पेयजल परियोजना के लिए भूमि पूजन किया जाएगा। इन दोनों परियोजनाओं के जरिए जल जीवन मिशन के तहत हजारों ग्रामीण परिवारों को हर घर जल उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
नौनेरा वृहद पेयजल परियोजना पर कुल 1661.14 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस परियोजना से कोटा और बूंदी जिलों के 749 गांवों और 6 कस्बों के करीब 1 लाख 13 हजार 287 परिवारों को पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। इनमें कोटा जिले के 384 गांव और 3 कस्बे तथा बूंदी जिले के 365 गांव और 3 कस्बे शामिल हैं।
इस परियोजना को चार कार्यकारी पैकेजों में विभाजित किया गया है। पहले पैकेज के तहत 207.38 करोड़ रुपये का कार्यादेश 4 दिसंबर 2025 को जारी किया गया था। इस पैकेज के अंतर्गत कोटा जिले के लाडपुरा, पीपल्दा और सांगोद तथा बूंदी जिले के केशवराय पाटन क्षेत्र के गांवों को लाभ मिलेगा।
दूसरे पैकेज के लिए 200.52 करोड़ रुपये का कार्यादेश जारी किया गया है, जिसके तहत पीपल्दा क्षेत्र के 165 गांव और एक कस्बे को परियोजना से जोड़ा जाएगा। तीसरे पैकेज के लिए 264.96 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें 219 गांवों और 2 कस्बों को लाभान्वित किया जाएगा। वहीं चौथे पैकेज के लिए 476.50 करोड़ रुपये का कार्यादेश जारी किया गया है।
इसके अलावा परवन-अकावद वृहद पेयजल परियोजना पर 3523.16 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस योजना के जरिए बारां, कोटा और झालावाड़ जिलों के 1402 गांवों और 276 ढाणियों के करीब 1 लाख 52 हजार 437 परिवारों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
अकावद बांध पर बन रही विशाल वाटर टनल इस परियोजना की सबसे खास कड़ी है। पहाड़ को चीरकर बनाई जा रही यह टनल पूरी होने के बाद बारां जिले के किसानों की बड़ी मात्रा में जमीन की सिंचाई संभव हो सकेगी, जिससे क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।
