कचरे में छिपा खजाना: राजस्थान के मार्बल वेस्ट में मिले दुर्लभ और रणनीतिक खनिज, पूरे प्रदेश में खोज तेज

Thursday, Jun 11, 2026-03:41 PM (IST)

जयपुर। राजस्थान के मार्बल वेस्ट डंप्स में वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है। अब तक जिन मार्बल के कचरे को बेकार और पर्यावरण के लिए खतरा माना जाता था, उनमें कोबाल्ट, क्रोमियम और गैलियम जैसे दुर्लभ और रणनीतिक खनिज पाए गए हैं। यह खोज राज्य के माइनिंग सेक्टर में नई संभावनाओं का द्वार खोल सकती है।

 

राजस्थान सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे प्रदेश में फैले माइनिंग वेस्ट डंप्स के मूल्यांकन का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत खान विभाग, राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट और IIT (ISM) धनबाद ने मिलकर अध्ययन किया। इसके तहत पहले चरण में प्रदेश के 78 डंप्स की पहचान कर उन्हें क्लस्टर्स में बांटा गया। उदयपुर और आसपास के क्षेत्र से 8 पिंक मार्बल और 2 ग्रीन मार्बल डंप्स का चयन कर विस्तृत जांच की गई।

 

सैंपल्स की लैब जांच के दौरान वैज्ञानिक भी आश्चर्यचकित रह गए। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, इन डंप्स में पाए गए दुर्लभ खनिजों की सांद्रता सामान्य भू-पर्पटी स्तर की तुलना में 25 से 40 गुना अधिक है। हालांकि, व्यावसायिक निकासी की व्यवहार्यता पर और अध्ययन जारी है।

 

उदयपुर क्लस्टर में सफलता मिलने के बाद अब बाकी 68 डंप्स की भी सघन जांच शुरू कर दी गई है। इसमें जियो-रेफरेंस्ड मैपिंग, सैंपलिंग और मिनरलॉजिकल एनालिसिस शामिल है। भविष्य में टंगस्टन, लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की खोज भी इसी सर्वे में की जाएगी। प्रमुख क्षेत्रों में उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, सलूंबर, ऋषभदेव, अजमेर, ब्यावर, सावर, नागौर, सिरोही, जोधपुर, बालेसर, सोजत सिटी और जालोर शामिल हैं।

 

राज्य सरकार की यह पहल केंद्र सरकार के 'नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन' के विजन से मेल खाती है। इन खनिजों की मांग डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग, ईवी बैटरियों और रक्षा उपकरणों के निर्माण में लगातार बढ़ रही है। यदि वेस्ट डंप्स से खनिजों की व्यावसायिक निकासी संभव हो पाती है, तो यह न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई पर ले जाने में भी महत्वपूर्ण साबित होगी।


Content Editor

Anil Jangid

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