राजस्थान बोर्ड को 4 साल बाद मिला स्थाई अध्यक्ष, हनुमान सिंह राठौड़ ने संभाला पदभार
Monday, Jun 22, 2026-03:21 PM (IST)
अजमेर: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE), अजमेर में चार वर्षों से चली आ रही तदर्थ व्यवस्था का अंत हो गया है। सोमवार को नवनियुक्त स्थाई अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने अजमेर स्थित बोर्ड मुख्यालय पहुंचकर विधिवत रूप से पदभार ग्रहण किया। उनके आगमन पर बोर्ड परिसर में अधिकारियों और कर्मचारियों ने भव्य स्वागत किया, जहां ढोल-नगाड़ों के साथ पुष्पवर्षा भी की गई।
पदभार ग्रहण करने से पहले उन्होंने बोर्ड परिसर स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना की और शुभ मुहूर्त में 11:55 बजे अपनी कुर्सी संभाली। इस अवसर पर उनका परिवार भी मौजूद रहा।
पद संभालते ही हनुमान सिंह राठौड़ ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका मुख्य फोकस केवल परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार करना होगा। उन्होंने बताया कि बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्र राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप तैयार किए जाएंगे, जिससे छात्रों में रटने की प्रवृत्ति कम हो और उनकी तार्किक क्षमता विकसित हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि राजस्थान बोर्ड की पाठ्यपुस्तकों को नए पाठ्यक्रम के अनुसार अपडेट किया जाएगा, जिसमें देश की सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और राष्ट्रीय मूल्यों को अधिक महत्व दिया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों और मूल्यांकनकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण देने की योजना भी तैयार की जाएगी।
नए अध्यक्ष ने बोर्ड स्टाफ की सराहना करते हुए कहा कि यहां का अनुभवयुक्त स्टाफ शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वे स्वयं पहले बोर्ड से जुड़े रहे हैं, इसलिए संस्थान की कार्यप्रणाली से भली-भांति परिचित हैं।
उन्होंने कहा कि भविष्य में बोर्ड की कार्यशैली में पारदर्शिता और समयबद्धता को प्राथमिकता दी जाएगी तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ निरंतर संवाद स्थापित किया जाएगा।
कार्यभार ग्रहण के अवसर पर उन्होंने उपस्थित स्कूली बच्चों को मिठाई खिलाकर उनका उत्साहवर्धन किया और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
पिछले वर्षों में बोर्ड से जुड़े विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एक प्रतिष्ठित संस्था है और यह कभी विवादों में नहीं रही, बल्कि कुछ व्यक्तियों के निर्णयों के कारण परिस्थितियां प्रभावित हुईं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से पूरी तरह बचा जाएगा।
इसके अलावा उन्होंने छात्रों के लिए एक बड़ा राहत भरा फैसला बताते हुए कहा कि अब छोटे दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों के लिए विद्यार्थियों को अजमेर मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके लिए जिला और संभाग स्तर के सहायता केंद्रों को और अधिक डिजिटल व सशक्त बनाया जाएगा, जिससे सेवाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकें।
