अलवर में जल संरक्षण से बढ़ा भूजल स्तर, हजारों संरचनाओं से किसानों और गांवों को मिल रही राहत
Thursday, Apr 09, 2026-05:21 PM (IST)
अलवर: राजस्थान के अलवर जिले में जल संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है, जहां जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत विभिन्न जल संचय संरचनाओं के निर्माण से भूजल स्तर में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। इस अभियान के अंतर्गत एनीकट, वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, जोहड, तालाब, मैजिक पिट, सोंक पिट, मेडबंदी जैसी संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इस पहल से जिले के किसानों और ग्रामीण इलाकों में राहत मिल रही है।
अलवर जिले में 29,000 जल संचय संरचनाएं बनाई जा रही हैं, जिनमें से 15,365 संरचनाएं पूरी हो चुकी हैं। इनमें पंचायत समिति रामगढ़, उमरैण, गोविंदगढ़, थानागाजी, राजगढ़, कठूमर, रैणी, मालाखेडा और लक्ष्मणगढ़ जैसी पंचायतों में लाखों रुपये की लागत से इन कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। शेष कार्य भी तेजी से प्रगति पर हैं और जल्द ही पूरे होने की उम्मीद है।
यह अभियान न केवल वर्षा जल का संचय करने में मदद कर रहा है, बल्कि इसके परिणामस्वरूप भूजल स्तर भी रिचार्ज हो रहा है। जल संचय संरचनाओं की मदद से वर्षा का पानी बर्बाद होने से बचता है और उसे इकट्ठा किया जा सकता है। इससे न केवल पशुओं को पीने का पानी मिल रहा है, बल्कि क्षेत्र में कृषि कार्यों में भी मदद मिल रही है।
अलवर जिले के जो क्षेत्र पहले डार्क जोन में आते थे, अब जल संरक्षण के प्रयासों से इन क्षेत्रों में जल की स्थिति बेहतर हो रही है। जल संचय जन भागीदारी अभियान ने जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में सकारात्मक प्रभाव डाला है। ग्राम पंचायतों में अब जल रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं, जिससे पूरे जिले में जल संरक्षण को लेकर एक नई उम्मीद जगी है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन जल संरचनाओं से न केवल पानी का सही उपयोग हो रहा है, बल्कि जो पानी सड़कों और नालियों में बहकर कीचड़ बन जाता था, उससे भी निजात मिल रही है। इस प्रयास ने इलाके के पर्यावरण और जल संकट को हल करने में मदद की है और कृषि व पेयजल की उपलब्धता को भी सुनिश्चित किया है।
