राजस्थान बॉर्डर पर सेना की मूवमेंट की जासूसी का खुलासा, सोलर CCTV से लाइव फुटेज विदेश भेजने के आरोप में 2 गिरफ्तार

Wednesday, Jun 17, 2026-04:28 PM (IST)

श्रीगंगानगर: राजस्थान-पंजाब सीमा से लगे क्षेत्र में सेना की गतिविधियों पर नजर रखने और संवेदनशील जानकारी विदेश भेजने के एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। इस मामले में पंजाब पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस विंग की संयुक्त कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि सोलर पावर से संचालित एक खुफिया सीसीटीवी कैमरे के जरिए सेना और सुरक्षा बलों की मूवमेंट की लाइव निगरानी की जा रही थी और यह फुटेज पाकिस्तान और कनाडा में बैठे संदिग्ध नेटवर्क तक भेजी जा रही थी।

 

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अमृतसर जिले के अजनाला क्षेत्र के गांव सराए निवासी अशोक कुमार और आकाशदीप सिंह के रूप में हुई है। दोनों से लगातार पूछताछ की जा रही है और इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड की तलाश जारी है।

 

पुलिस जांच में सामने आया है कि बठिंडा-मलोट नेशनल हाईवे पर एक बिजली के खंभे पर मार्च महीने में सोलर पावर से चलने वाला कैमरा लगाया गया था। यह कैमरा पिछले लगभग तीन महीनों से सक्रिय था और लगातार इलाके की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग के साथ-साथ लाइव ट्रांसमिशन भी कर रहा था।

 

जांच एजेंसियों के अनुसार, कैमरे से प्राप्त संवेदनशील फुटेज का इस्तेमाल राजस्थान, पंजाब और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में सेना और सुरक्षा बलों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए किया जा रहा था। विशेष रूप से श्रीगंगानगर, फाजिल्का और फिरोजपुर बॉर्डर की ओर जाने वाले सैन्य काफिलों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी।

 

पुलिस को यह जानकारी 10 जून को गुप्त सूचना के आधार पर मिली, जिसके बाद जांच शुरू की गई। तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया नेटवर्क की मदद से पूरे मॉड्यूल का खुलासा हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि अशोक कुमार ने कैमरे, सिम कार्ड और तकनीकी उपकरणों की व्यवस्था की थी, जबकि आकाशदीप सिंह ने मौके पर जाकर इसे स्थापित किया था।

 

श्रीगंगानगर के पुलिस अधीक्षक ने पंजाब पुलिस से इस मामले पर जानकारी ली है और जिले में लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की भी जांच के आदेश दिए गए हैं। हालांकि प्रारंभिक जांच में श्रीगंगानगर क्षेत्र में सीधे तौर पर ऐसे किसी कैमरे के प्रमाण नहीं मिले हैं।

 

फिलहाल पंजाब पुलिस की विशेष टीमें पूरे नेटवर्क की तह तक जाने में जुटी हैं। यह मामला देश की सीमावर्ती सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जहां साधारण दिखने वाले उपकरणों के जरिए संवेदनशील सैन्य जानकारी बाहर भेजे जाने की आशंका सामने आई है।


Content Editor

Anil Jangid

सबसे ज्यादा पढ़े गए

Related News