राजस्थान में ‘दिमागी नक्सल अधिवक्ता समूह’ गठित, जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने का लिया संकल्प
Tuesday, Aug 25, 2026-05:29 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान में अधिवक्ताओं के एक समूह ने राज्य स्तर पर ‘दिमागी नक्सल अधिवक्ता समूह’ के गठन का निर्णय लिया है। समूह का उद्देश्य संविधान की प्रस्तावना में आस्था रखते हुए देश और समाज से जुड़े समसामयिक एवं जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाना बताया गया है।
जयपुर में आयोजित बैठक में 100 से अधिक अधिवक्ताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में पूर्व महाधिवक्ता गिरधारी सिंह बापना, अतिरिक्त महाधिवक्ता विभूति भूषण, अनिल मेहता, आरपी सिंह, इन्द्रराज सैनी, पूर्व लोक अभियोजक संत कुमार जैन सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे। ध्रुव टेलर, ललिता महरवाल, धर्मराज बैरवा और प्रदीप सिंह राजपूत की अध्यक्षता में हुई बैठक में समूह के विस्तार और आगामी गतिविधियों को लेकर चर्चा की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि राजस्थान में जहां-जहां न्यायालय हैं, वहां समूह की शाखाएं स्थापित की जाएंगी। समूह ने जयपुर और जोधपुर में सीजेपी कार्यकर्ताओं पर एबीवीपी तथा युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए कथित हमलों की निंदा करते हुए पीड़ितों के साथ एकजुटता जताई और आवश्यक सहयोग देने का निर्णय लिया।
समूह ने युवाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा 24 अगस्त 2026 को लिए गए स्वतः संज्ञान का भी स्वागत किया।
शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों पर फोकस
बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, महंगाई, रोजगार और भ्रष्टाचार जैसे जनहित के मुद्दों को सोशल मीडिया के माध्यम से मजबूती से उठाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा आम नागरिकों को रोजमर्रा में होने वाली परेशानियों को भी अभियान का हिस्सा बनाने पर सहमति बनी।
इन मुद्दों में कथित वीआईपी आवागमन से होने वाली परेशानी, बंद एस्केलेटर, पैदल यात्रियों के लिए ज़ेब्रा क्रॉसिंग का अभाव, फुटपाथों पर अवरोध, जेवीवीएनएल के खुले एवं खतरनाक जंक्शन बॉक्स, सड़कों की चौड़ाई कम करने वाले रैंप एवं उद्यान, अव्यवस्थित साइनेज तथा अवैध पोस्टर-बैनर जैसे विषय शामिल हैं।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन और जनजागरूकता अभियान
समूह ने समसामयिक एवं जनहित के मुद्दों पर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन और जनजागरूकता अभियान आयोजित करने का फैसला किया है। बैठक में भारतीय बार काउंसिल के अध्यक्ष को पद से हटाने संबंधी प्रस्ताव भी पारित किया गया।
बैठक में सांप्रदायिक शक्तियों और उनके कथित कृत्यों को तथ्यों एवं तर्कों के आधार पर जनता के सामने रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। साथ ही सूचना का अधिकार, जनहित याचिकाओं और आपराधिक मामलों के संचालन के लिए अलग-अलग प्रकोष्ठ गठित करने का सुझाव दिया गया।
समूह ने देश की नवरत्न कंपनियों के निजीकरण को रोकने तथा न्यूनतम मजदूरी 28,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग भी उठाई।
