कोटा के चंद्रराज दूसरे प्रयास में बने RAS: बिना कोचिंग ही 877वीं रैंक
Saturday, Apr 18, 2026-07:55 PM (IST)
कोटा: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने 2024 के आरएएस परीक्षा का परिणाम जारी किया, जिसमें कोटा जिले के चंद्रराज गुर्जर और नरेश मीणा की सफलता ने कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर उभरी। चंद्रराज ने बिना कोचिंग के दूसरे प्रयास में 877वीं रैंक हासिल की, जबकि नरेश ने भी अपने दूसरे प्रयास में सफलता पाई और उनकी 1290वीं रैंक आई। दोनों ही अभ्यर्थी किसान परिवार से हैं और उनके परिजनों ने उन्हें पढ़ाई के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया।
चंद्रराज गुर्जर का कहना है कि वह पाचन कुई (कोटा) के रहने वाले हैं, और उनके पिता ओम प्रकाश खेती करते हैं, जबकि उनकी मां गृहिणी हैं। चंद्रराज ने बीएससी करने के बाद बीएड की डिग्री प्राप्त की और उसी दौरान बड़े भाई के कहने पर आरएएस की तैयारी शुरू की। पहले प्रयास में वह मेंस क्लियर नहीं कर सके, लेकिन हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में उन्होंने घर पर ही नियमित 10-12 घंटे पढ़ाई की और खेतों में भी काम किया जब उन्हें मनोबल बढ़ाने के लिए ब्रेक की जरूरत होती थी। इस बार उनका मेंस क्लियर हुआ, और इंटरव्यू में भी अच्छा प्रदर्शन किया। उन्होंने 877वीं रैंक हासिल की और MBS श्रेणी में 20वीं रैंक प्राप्त की।
इंटरव्यू के दौरान पैनल ने उन्हें करंट अफेयर्स और उनके विषय से जुड़े सवाल पूछे। एक सवाल खेतों में काम आने वाले औजारों के बारे में था, वहीं एक अन्य सवाल था - "पुरुषों को कौन से अधिकार देने चाहिए?"
नरेश मीणा का भी परिश्रम और संघर्ष प्रेरणादायक है। नरेश, जो नोनेरा गांव के निवासी हैं, ने बीएससी के बाद जयपुर से आरएएस की कोचिंग की। पहले प्रयास में वह केवल कुछ अंक से मेंस क्लियर नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और दूसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। नरेश का कहना है कि उन्होंने रोजाना 10-12 घंटे पढ़ाई की और परिवार के साथ खेतों में भी समय बिताया। उनके पिता दौलत मीणा भी किसान हैं, और परिवार के अन्य सदस्य भी उन्हें पढ़ाई में मदद करते थे।
नरेश के इंटरव्यू में पॉलिटिकल और सब्जेक्ट से संबंधित सवाल पूछे गए, और करंट अफेयर्स पर भी चर्चा हुई। उनका कहना है कि उनके परिवार ने कभी उन पर पढ़ाई का प्रेशर नहीं डाला, और उन्हें हमेशा आत्मविश्वास और प्रेरणा दी।
चंद्रराज और नरेश की सफलता यह साबित करती है कि कठिन मेहनत, सही दिशा, और पारिवारिक समर्थन से कोई भी कठिन परीक्षा पार की जा सकती है। इन दोनों युवा अभ्यर्थियों की सफलता ने उनके परिवारों और क्षेत्रों में गर्व और खुशी का माहौल बना दिया है।
