चित्तौड़गढ़ सब रजिस्ट्रार ऑफिस में बड़ा खेल? नियम ताक पर रख लाखों का राजस्व नुकसान
Sunday, Mar 01, 2026-06:33 PM (IST)
चित्तौड़गढ़ । जिला मुख्यालय पर कार्यरत सब रजिस्ट्रार मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग की अनोखी कार्यशैली ने सरकार के ही नियमों एवं आदेशों को ही अनदेखा कर दिया। इसके चलते राजकोश को लाखों रूपयें का नुकसान हुआ था। जब हमारे संवाददाता ने इस सम्बन्ध में जानकारियां एकत्रित करनी प्रारंभ की गई तो विभाग भी अपनी गलती को छिपाने के लिए सक्रिय हो चला तथा लगभग तीन माह बाद इस मामले में उप महानिरीक्षक (डीआईजी), मुद्रांक एवं पंजीयन वृत्त भीलवाड़ा के यहां सब रजिस्ट्रार द्वारा केस भी दर्ज करवाया गया तथा सम्बन्धित को रिकवरी का नोटिस भी जारी किया गया।
उप पंजीयक कार्यालय में ऐसे कई वाकिये ...
राजस्थान सरकार को रेवेन्यू देने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाला तथा मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग के अधीन संचालित उप पंजीयक कार्यालय हमेशा अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा में रहता आया है। जिला मुख्यालय पर भी उप पंजीयक कार्यालय की विचित्र कार्यशैली विगत कुछ माह में देखने को मिली है जहां राजस्थान सरकार एवं विभाग के आदेशों एवं नियमों की अनदेखी करते हुए कुछ लोगों को लाभान्वित करने का प्रयास करते हुए राजकोष को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है। राजकोष को नुकसान पहुंचाने के जो दो मामले हमारे संवाददाता ने उजागर किये है वह दोनो नवम्बर माह में एक ही दिनांक को पंजीबद्ध किये गये थे। इससे पूर्व भी एक मामला कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद पंजीबद्ध कर दिया गया। यही नहीं एक मामले में सिर्फ एक बिजली के बिल के आधार पर पंजीबद्ध कर दिया गया।
आदेश क्या कहते है ...
राजस्थान सरकार के वित्त (कर) विभाग के संयुक्त शासन सचिव ने दिनांक 05.04.2023 को परिपत्र क्रमांक प.2 (10) वित्त/ कर/ 2010 के माध्यम से राजस्थान स्टाम्प नियम 2004 के नियम 57 के तहत प्रदत्त शक्तियों के अनुसरण में अचल सम्पत्ति के मौका निरीक्षण की नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू की थी। इस परिपत्र के बिंदु बी में स्पष्ट लिखा हुआ है कि पंजीयन हेतु प्रस्तुत अचल संपत्ति के दस्तावेज की मालियत यदि 50 लाख रूपये एवं इससे अधिक हो तो अचल सम्पत्ति का अनिवार्य रूप से मौका निरीक्षण करने के बाद ही नियमानुसार सही मालियत निर्धारित कर उस पर स्टाम्प ड्यूटी, सरचार्ज, पंजीयन शुल्क व अन्य शुल्क की वसूली सुनिश्चित करने के बाद ही दस्तावेज पंजीबद्ध किया जाए।
उपनगरीय क्षेत्र में व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित सम्पत्ति को आवासीय माना
शहर के उपनगरीय क्षेत्र में उदयपुर मार्ग पर व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित एक सम्पत्ति को आवासीय मानते हुए उसकी वैल्यू आंकते हुए रजिस्ट्री की गई। गौरतलब यह है कि उक्त संपत्ति को पंजीबद्ध करने के पांच दिन बाद मौका पर्चा तैयार किया गया जो कि विभाग के ही आदेश एवं नियम को जानबूझकर अनदेखा करने की कार्यप्रणाली को इंगित करता है। नियमों के अनुसार उक्त सम्पत्ति को पंजीबद्ध करने से पूर्व मौका पर्चा तैयार किया जाता और वास्तविक वैल्यू आंकी जाती तो राजकोश में लाखों रूपयें के राजस्व की आमदनी और हो सकती थी।
दस दिन में ही तीसरी मंजिल घटी तथा चौथी मंजिल बढ़ी
नवम्बर माह में ही एक अन्य व्यावसायिक सम्पत्ति षहरी क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर स्थित एक बहुमंजिला व्यावसायिक परिसर की रजिस्ट्री भी पंजीबद्ध की गई। यहां गौर करने वाली बात यह है कि उप पंजीयक ने उक्त सम्पत्ति के पंजीबद्ध होने के बाद एक सप्ताह में ही दो बार मौका पर्चा बनाया और दोनो ही बार उक्त सम्पत्ति की साईज में अन्तर देखा गया। उक्त सम्पत्ति को पंजीबद्ध करने के अगले ही दिन का बनाये गये मौका पर्चा में कुल निर्मित भाग में तीसरी मंजिल पर लगभग 9 हजार वर्ग फीट का तथा चौथी मंजिल पर लगभग सवा दो हजार वर्ग फीट का निर्माण के साथ ही एक हजार वर्ग फीट का टीन षेड़ का निर्माण दर्शाया गया था। उक्त मौका पर्चा के ठीक दसवे दिन एक और मौका पर्चा तैयार किया गया जिसमें कुल निर्मित भाग में तिसरी मंजिल पर लगभग 8 हजार वर्ग फीट तथा चौथी मंजिल पर लगभग सवा चार हजार वर्ग फीट के निर्माण के साथ ही दो हजार वर्ग फीट का टीन षेड़ दर्शाया गया। एक ही भूखण्ड के सम्बन्ध में एक ही अधिकारी द्वारा बनाये मौका पर्चा रिपोर्ट में अलग अलग साइज आना कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है।
बैक डेट में किया मौका पर्चा तैयार
शहरी क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर स्थित एक बहुमंजिला इस व्यावसायिक परिसर की वास्तविक वैल्यू भी जानबूझकर कम आंकी गई तथा यहां भी नियमों एवं आदेशों को ताक में रखकर मौका पर्चा तैयार करने से पूर्व ही उक्त संपत्ति को पंजीबद्ध कर दिया गया। नवम्बर के प्रथम सप्ताह में जब उक्त संपत्ति के नियमानुसार चालान के माध्यम से दस्तावेज लिए तो उस वक्त मौका पर्चा नही दिया गया। बाद में सूचना के अधिकार के माध्यम से जब दस्तावेज लिए तो अलग अलग दिनांक के दो मौका पर्चा उपलब्ध करवाये गये। मतलब साफ है कि आनन फानन में बाद में बैक डेट में मौका पर्चा तैयार किया गया था। लेकिन अधिकारी यह भूल गये कि ऐसे मामले में एसएसओ आईडी के माध्यम से ऑनलाइन करना भी जरूरी होता है।
इनका कहना है ...
(1) शहरी क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर स्थित बहुमंजिला व्यावसायिक परिसर मामले में श्रीमान् उप महानिरीक्षक, मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग, वृत्त भीलवाड़ा के यहां नियमानुसार मेरे द्वारा पंजीयन एक्ट के तहत केस दर्ज करवाया जा चुका है। सम्बन्धित पार्टी ने डीआईजी ऑफिस भीलवाड़ा में तथा सब रजिस्ट्रार ऑफिस चित्तौड़गढ़ में कुछ पैसा जमा भी करवाया है। (सुनीता सांखला, सब रजिस्ट्रार चित्तौड़गढ़)
(2) राजस्व से सम्बन्धित मामलों में पंजीयन एक्ट में सुनवाई होती है। उप पंजीयक केस बनाकर उप महानिरीक्षक को सब्मिट करते है तथा बाद में नोटिस जारी किया जाता है। उक्त सम्पत्ति के सम्बन्ध में पंजीयन एक्ट की धारा 54 के तहत अंतर राशि/ वसूल योग्य राशि 38,68,927 रूपये का एक नोटिस जारी किया गया था। फिलहाल मेंरी पीएम विजिट को लेकर ड्यूटी लगी हुई है तो अपडेट बाद में ही करा पाऊंगा। (मौ. ताहिर खान, उप महानिरीक्षक, मुद्रांक एवं पंजीयन विभाग, वृत्त भीलवाड़ा)
