अजमेर दरगाह परिसर में महाशिवरात्रि पर ‘रुद्राभिषेक’ की अनुमति की मांग, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
Saturday, Feb 14, 2026-08:04 PM (IST)
अजमेर | महाशिवरात्रि से पूर्व अजमेर में एक नई धार्मिक और प्रशासनिक बहस ने जोर पकड़ लिया है। ‘महाराणा प्रताप सेना’ के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजवर्धन सिंह परमार ने जिलाधिकारी, अजमेर को ज्ञापन सौंपकर महाशिवरात्रि के अवसर पर अजमेर दरगाह परिसर में ‘रुद्राभिषेक’ की अनुमति मांगी है।
ज्ञापन (पत्रांक-89/3450/MPS, दिनांक 14/02/2026) में संगठन की ओर से कहा गया है कि उनकी आस्था और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर वर्तमान अजमेर दरगाह परिसर को मूल रूप से एक प्राचीन हिंदू मंदिर बताया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस संबंध में मामला माननीय न्यायालय में विचाराधीन है।
क्या है मांग?
महाराणा प्रताप सेना ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर परिसर के भीतर स्थित कथित प्राचीन हिंदू प्रतीकों के समीप ‘रुद्राभिषेक’ और शिव पूजन की अनुमति दी जाए। संगठन ने कार्यक्रम के दौरान शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूर्ण सहयोग का आश्वासन भी दिया है और प्रशासन से पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रशासनिक और कानूनी पहलू
चूंकि मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया गया है, ऐसे में प्रशासन की भूमिका संवेदनशील मानी जा रही है। किसी भी निर्णय से पहले जिला प्रशासन द्वारा कानूनी स्थिति, सुरक्षा आकलन और सामाजिक समरसता को ध्यान में रखा जाएगा।
धार्मिक और सामाजिक प्रभाव
महाशिवरात्रि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रमुख पर्व है। वहीं, अजमेर दरगाह देश-विदेश में प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के रूप में जानी जाती है, जहां विभिन्न धर्मों के लोग श्रद्धा से पहुंचते हैं। ऐसे में यह मांग धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक निर्णय और न्यायालय की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
