37 साल बाद कुंभ राशि में लग रहा है सूर्यग्रहण, 17 फरवरी 2026 को लगेगा साल का पहला सूर्य ग्रहण
Sunday, Feb 15, 2026-09:29 AM (IST)
जयपुर। साल 2026 में भी चार ग्रहण देखने को मिलेंगे। इनमें से दो सूर्य ग्रहण और दो चंद्र ग्रहण होंगे। वर्ष 2026 में कुल दो चंद्र ग्रहण लगने वाले हैं। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में तो चन्द्र ग्रहण मार्च में लगेगा । दूसरा सूर्य व चन्द्र ग्रहण अगस्त में लगेगा। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि साल 2026 का पहला सूर्यग्रहण 17 फरवरी को लगने वाला है। यह सूर्यग्रहण कुंभ राशि में धनिष्ठा नक्षत्र में लगेगा। यानी सूर्य इस समय कुंभ राशि में गोचर करेंगे सूर्य के साथ कुंभ राशि में राहु भी मौजूद रहेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 37 साल बाद कुंभ राशि में फिर से ऐसा सूर्यग्रहण लग रहा है जब ग्रहण के दौरान सूर्य के साथ राहु, बुध, शुक्र और चंद्रमा भी मौजूद रहेंगे। 7 मार्च 1989 में जब सूर्यग्रहण लगा था। उस समय भी ग्रहों की ऐसी ही स्थिति थी। अब साल 2026 में जब सूर्यग्रहण लगेगा उस समय भी यह सभी ग्रह कुंभ राशि में गोचर करेंगे। सूर्य और राहु की युति कुंभ राशि में बनने से ग्रहण योग भी प्रभावी होगा।
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा। यह एक कंकण सूर्य ग्रहण होगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन जिम्बाब्वे, दक्षिण अफ्रीका, जाम्बिया, मोजम्बीक, मॉरीशस, अंटार्कटिका सहित तन्जानिया और दक्षिण अमेरिकी देशों में दिखाई देगा। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, 2026 को लगेगा। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या को यह ग्रहण लगेगा। भारत को छोड़कर उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन में दिखाई देगा। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, 2026 को लगेगा। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या को यह ग्रहण लगेगा। भारत को छोड़कर उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन में दिखाई देगा।
17 फरवरी 2026 को पहला सूर्य ग्रहण
पहला सूर्य ग्रहण साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को लगने जा रहा है। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। 17 फरवरी को लगने वाले सूर्य ग्रहण को अटार्कटिका, अर्जेंटीना, बोत्सवाना, ब्रिटिश इंडियन ओशन क्षेत्र, चिली, कोमोरोस, इस्वातिनी (स्वाजीलैंड), फ्रांसीसी दक्षिणी क्षेत्र, लेसोथो, मेडागास्कर, मलावी, मॉरीशस, मायोटे, मोजाम्बिक, नामीबिया, रियूनियन आईलैंड्स, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिणी जॉर्जिया/सैंडविच आईलैंड्स, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बॉब्वे में देखा जा सकता है। हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा।
भारत में दिखाई नहीं देगा सूर्य ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। चूंकि यह खगोलीय घटना भारतीय समयानुसार घटित नहीं होगी, इसलिए भारत में इस ग्रहण का कोई धार्मिक या ज्योतिषीय प्रभाव नहीं माना जाएगा। यही कारण है कि भारत में इस ग्रहण के लिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।
कहां नजर आएगा साल का पहला सूर्यग्रहण
साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लगेगा। ये वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा जो मुख्य रूप से अटार्कटिका, अर्जेंटीना, बोत्सवाना, ब्रिटिश इंडियन ओशन क्षेत्र, चिली, कोमोरोस, इस्वातिनी (स्वाजीलैंड), फ्रांसीसी दक्षिणी क्षेत्र, लेसोथो, मेडागास्कर, मलावी, मॉरीशस, मायोटे, मोजाम्बिक, नामीबिया, रियूनियन आईलैंड्स, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिणी जॉर्जिया/सैंडविच आईलैंड्स, तंजानिया, जाम्बिया और जिम्बॉब्वे में देखा जा सकता है।
ग्रहण का समय और अवधि
इस सूर्य ग्रहण का भारतीय समयानुसार 3:27 बजे पर आरंभ होगा और 6:06 बजे पर समाप्त होगा। यह ग्रहण कुल 4 घंटे 31 मिनट की अवधि तक रहेगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और ना ही इसका सूतक काल मान्य होगा।
प्राकृतिक आपदाओं की आशंका
सूर्य ग्रहण की वजह से प्राकृतिक आपदाओं का समय से ज्यादा प्रकोप देखने को मिलेगा। इसमें भूकंप, बाढ़, सुनामी, विमान दुर्घटनाएं का संकेत मिल रहे हैं। प्राकृतिक आपदा में जनहानि कम ही होने की संभावना है। फिल्म एवं राजनीति से दुखद समाचार। व्यापार में तेजी आएगी। बीमारियों में कमी आएगी। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आय में इजाफा होगा। वायुयान दुर्घटना होने की संभावना। पूरे विश्व में राजनीतिक अस्थिरता यानि राजनीतिक माहौल उच्च होगा। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा होंगे। सत्ता संगठन में बदलाव होंगे। पूरे विश्व में सीमा पर तनाव शुरू हो जायेगा। आंदोलन, हिंसा, धरना प्रदर्शन हड़ताल, बैंक घोटाला, उपद्रव और आगजनी की स्थितियां बन सकती है।
