महापंचायत के बाद किसानों का बड़ा फैसला, 08 जनवरी को ट्रैक्टरों के साथ जयपुर कूच!
Tuesday, Jan 06, 2026-12:09 PM (IST)
जब खेतों की मेहनत बारिश में बह जाए और मुआवज़े की फाइलें सरकारी दफ्तरों में अटक जाएं, तब किसान सिर्फ इंतज़ार नहीं करता—वह आंदोलन की राह चुनता है। राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता में सोमवार को हुई किसानों की महापंचायत भी इसी गुस्से और हताशा की आवाज़ बनकर सामने आई। 12 सूत्रीय मांगों को लेकर आयोजित इस महापंचायत में आसपास के दर्जनों गांवों से बड़ी संख्या में किसान पहुंचे। प्रशासन के साथ हुई वार्ता जब किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी, तो महापंचायत धरने में तब्दील हो गई और किसानों ने ऐलान कर दिया कि वे 08 जनवरी को ट्रैक्टरों के साथ जयपुर कूच करेंगे।
महापंचायत में मौजूद किसानों का कहना था कि बीते समय अतिवृष्टि ने उनकी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया, लेकिन सरकार की ओर से राहत और मुआवज़े को लेकर अब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं हुआ है। किसानों का आरोप है कि फसल खराबे के सर्वे में केवल 57 गांवों को शामिल किया गया, जबकि 74 गांव अब भी मुआवज़े से वंचित हैं। यही नहीं, पुष्कर–मेड़ता रेलवे लाइन विस्तार के दौरान भूमि अधिग्रहण को लेकर भी किसानों में भारी नाराज़गी है।
फसल खराबे और भूमि अधिग्रहण पर नाराज़गी
किसानों का कहना है कि अतिवृष्टि के कारण उनकी खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। शुरुआती सर्वे के बाद जिन गांवों को राहत सूची में शामिल किया गया, उनके अलावा कई गांवों के किसान आज भी मुआवज़े की राह देख रहे हैं। महापंचायत में यह मुद्दा सबसे ज्यादा गूंजा। किसानों ने मांग की कि सभी प्रभावित गांवों को फसल खराबे में शामिल कर तुरंत मुआवज़ा दिया जाए, ताकि वे अगली फसल की तैयारी कर सकें।
इसके साथ ही पुष्कर–मेड़ता रेलवे लाइन विस्तार के लिए हो रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर भी किसानों ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि जमीन अधिग्रहण डीएलसी रेट पर किया जाना चाहिए और किसानों की सहमति व पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। किसानों के अनुसार, मौजूदा प्रक्रिया में उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
प्रशासन से वार्ता रही बेनतीजा
महापंचायत के दौरान किसान यूनियनों के प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन यह वार्ता किसी ठोस समाधान तक नहीं पहुंच सकी। किसानों का कहना है कि वे कई बार अपनी समस्याएं प्रशासन के सामने रख चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। इसी नाराज़गी के चलते महापंचायत ने धरने का रूप ले लिया।
इस पूरे मामले पर एसडीएम सूर्यकुमार ने बताया कि महापंचायत में मौजूद किसान यूनियन के नेताओं और प्रतिनिधियों ने अपनी समस्याएं और मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की ओर से दिए गए ज्ञापन और मांगों को प्रदेश सरकार तक भेज दिया गया है, लेकिन इन पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर ही लिया जाएगा।
08 जनवरी को जयपुर कूच का ऐलान
महापंचायत के समापन के बाद किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने साफ कर दिया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो वे 08 जनवरी को ट्रैक्टरों पर सवार होकर जयपुर पहुंचेंगे। किसानों का कहना है कि अब वे सिर्फ ज्ञापन और बैठकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी आवाज़ सीधे राजधानी तक लेकर जाएंगे।
किसान नेताओं के अनुसार, जयपुर कूच के दौरान बड़ी संख्या में ट्रैक्टर शामिल होंगे और यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से किया जाएगा। वहीं, इस ऐलान के बाद प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न हो।
सरकार के सामने बड़ी चुनौती
किसानों के इस ऐलान ने एक बार फिर राज्य सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। एक ओर जहां किसान अपनी मांगों को लेकर आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार के लिए इस आंदोलन को संभालना और समय रहते समाधान निकालना जरूरी हो गया है। जानकारों का मानना है कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो यह आंदोलन और तेज हो सकता है।
फिलहाल, मेड़ता की महापंचायत से उठी यह आवाज़ अब राजधानी की ओर बढ़ने को तैयार है। अब देखना यह होगा कि 08 जनवरी से पहले सरकार कोई ठोस कदम उठाती है या फिर किसान ट्रैक्टरों के साथ जयपुर की सड़कों पर अपनी ताकत दिखाते नजर आते हैं।
