राजस्थान में क्रिटिकल केयर ब्लॉक योजना सुस्त: 33 जिलों में बनने थे CCB, तीन साल में सिर्फ 3 ही तैयार
Wednesday, Mar 11, 2026-10:33 AM (IST)
राजस्थान में गंभीर मरीजों को बेहतर और त्वरित इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई क्रिटिकल केयर ब्लॉक (CCB) योजना धीमी गति का शिकार हो गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने वर्ष 2023 में राज्य के 33 जिलों में क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाने की मंजूरी दी थी, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी केवल तीन जिलों में ही सीसीबी यूनिट तैयार हो सकी है। बाकी जिलों में निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है।
इस देरी का असर सीधे तौर पर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल में भी अधूरा निर्माण
झुंझुनूं जिले के बीडीके अस्पताल में भी क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। यहां 100 बेड की सीसीबी यूनिट बनाई जा रही है, लेकिन लंबे समय तक जमीन तय नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो पाया।
बजट मंजूर होने के करीब दो साल बाद जमीन चिन्हित की गई, जिसके बाद वर्ष 2025 में निर्माण कार्य शुरू किया गया। हालांकि अभी तक यह काम अधूरा है और मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
केवल तीन जिलों में ही काम पूरा
राजस्थान में अब तक केवल जयपुर, जोधपुर और प्रतापगढ़ जिलों में ही क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण पूरा हो पाया है।
इसके अलावा राज्य के 30 जिलों में यह परियोजना अभी भी अधूरी है।
जिन जिलों में सीसीबी यूनिट का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
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जालौर
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अजमेर
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अलवर
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सीकर
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चूरू
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झुंझुनूं
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बांसवाड़ा
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बारां
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बाड़मेर
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भरतपुर
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भीलवाड़ा
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बीकानेर
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बूंदी
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चित्तौड़गढ़
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दौसा
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धौलपुर
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डूंगरपुर
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हनुमानगढ़
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जैसलमेर
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झालावाड़
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करौली
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कोटा
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नागौर
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पाली
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राजसमंद
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सिरोही
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सवाई माधोपुर
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श्रीगंगानगर
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टोंक
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उदयपुर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने इन परियोजनाओं के लिए 26 अगस्त 2023 को बजट जारी कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद अधिकांश जिलों में निर्माण कार्य समय पर पूरा नहीं हो पाया।
निर्माण में देरी की तीन प्रमुख वजह
क्रिटिकल केयर ब्लॉक के निर्माण में देरी के पीछे कई प्रशासनिक और तकनीकी कारण सामने आए हैं।
पहली वजह टेंडर प्रक्रिया में देरी रही। एनएचएम ने इस परियोजना के लिए राजमेस (RajMES) को नोडल एजेंसी बनाया था, जिसने आगे आरएसआरडीसी (RSRDC) को निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सौंपी। टेंडर प्रक्रिया लंबी होने के कारण निर्माण कार्य समय पर शुरू नहीं हो सका।
दूसरी वजह कई जिलों में जमीन चिन्हित करने में देरी रही। झुंझुनूं सहित राज्य के छह जिलों में जमीन तय करने की प्रक्रिया काफी देर से शुरू हुई।
तीसरी वजह निर्माण कार्य की निगरानी में कमी बताई जा रही है। आरएसआरडीसी के तकनीकी अधिकारियों की मॉनिटरिंग कम होने के कारण कई जिलों में काम बहुत धीमी गति से चल रहा है।
गंभीर मरीजों को मिलना था बड़ा लाभ
क्रिटिकल केयर ब्लॉक का उद्देश्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उनके ही जिलों में बेहतर इलाज उपलब्ध कराना था।
इन ब्लॉकों में विशेष रूप से निम्न बीमारियों के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जानी थी—
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ब्रेन हेमरेज
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न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर
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पैरालिसिस
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इंटरनल ब्लीडिंग
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हार्ट से जुड़ी गंभीर बीमारियां
इन इकाइयों में विशेषज्ञ चिकित्सक, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ नर्सिंग स्टाफ और आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाने थे।
उपकरण और संसाधन भी उपलब्ध नहीं
निर्माण कार्य अधूरा होने के कारण अभी तक इन क्रिटिकल केयर ब्लॉकों के लिए मेडिकल उपकरण और संसाधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है।
इस वजह से गंभीर मरीजों को उपचार के लिए बड़े शहरों के अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
NHM का दावा
इस मामले पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक डॉ. अमित यादव का कहना है कि प्रदेश के 33 जिलों में क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण कार्य चल रहा है।
उन्होंने कहा कि सभी परियोजनाओं का काम शुरू हो चुका है और जल्द ही इन्हें पूरा कर लिया जाएगा।
