जन आवास योजना केस: उपभोक्ता आयोग में कलेक्टर-ADM सहित 6 अधिकारी पेश, 6 करोड़ जमा; 500 फ्लैट जल्द देने का आश्वासन
Friday, Mar 13, 2026-07:03 PM (IST)
मुख्यमंत्री जन आवास योजना से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया। आयोग के आदेश पर शुक्रवार (13 मार्च) को जिला कलेक्टर, एडीएम और नगर परिषद आयुक्त सहित छह अधिकारी आयोग के समक्ष पेश हुए।
सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने उपभोक्ताओं के बकाया भुगतान और मुआवजे के लिए 6 करोड़ रुपए के चेक आयोग में जमा कराए। साथ ही प्रशासन और नगर परिषद की ओर से यह भरोसा भी दिया गया कि योजना के तहत निर्माणाधीन 500 फ्लैट्स जल्द ही तैयार कर लाभार्थियों को सौंप दिए जाएंगे।
इस मामले का असर झुंझुनूं में मुख्यमंत्री जन आवास योजना के 1536 लाभार्थियों पर पड़ेगा, जो लंबे समय से अपने फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
आयोग के समन पर पेश हुए अधिकारी
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष मनोज मील ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किए थे।
आयोग के समक्ष पेश होने वालों में—
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जिला कलेक्टर अरुण गर्ग
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अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) अजय आर्य
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नगर परिषद आयुक्त देवीलाल बोचलिया
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एसडीएम कौशल्या विश्नोई
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तत्कालीन एसडीएम हवाई सिंह यादव
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तहसीलदार महेंद्र मूंड
शामिल रहे।
इन अधिकारियों की उपस्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि नगर परिषद ने जिला उपभोक्ता आयोग के फैसले के खिलाफ पहले राज्य आयोग और फिर राष्ट्रीय आयोग में अपील की थी। हालांकि दोनों ही आयोगों ने जिला आयोग के फैसले को सही ठहराया।
इसके बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को तलब किया।
6 करोड़ रुपए जमा, 500 फ्लैट जल्द देने का वादा
आयोग की सख्ती का असर यह हुआ कि वर्षों से लंबित मामले में तुरंत कार्रवाई शुरू हो गई।
नगर परिषद की ओर से उपभोक्ताओं के बकाया और मुआवजे के भुगतान के लिए 6 करोड़ रुपए के चेक आयोग में जमा कराए गए।
इसके साथ ही जिला प्रशासन और नगर परिषद ने संयुक्त रूप से आयोग को आश्वासन दिया कि योजना के तहत 500 फ्लैट्स का निर्माण युद्ध स्तर पर पूरा कर जल्द ही लाभार्थियों को कब्जा सौंप दिया जाएगा।
नगर परिषद आयुक्त ने यह भी कहा कि इस मामले के समाधान के लिए विशेष हेल्प डेस्क स्थापित की जाएगी, जिससे लाभार्थियों की शिकायतों का समाधान तेजी से किया जा सके।
धारा 72 का डर, जेल और जुर्माने का प्रावधान
अधिकारियों की इस सक्रियता के पीछे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 72 का भी बड़ा प्रभाव माना जा रहा है।
इस धारा के तहत न्यायालय या आयोग के आदेशों की अवहेलना करने पर संबंधित अधिकारी को—
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3 साल तक की जेल
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1 लाख रुपए तक का जुर्माना
हो सकता है।
आयोग ने इस मामले को न्यायिक अवज्ञा मानते हुए अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया था, जिसके बाद प्रशासनिक स्तर पर तेजी से कार्रवाई शुरू हुई।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद झुंझुनूं के मंड्रेला रोड स्थित मुख्यमंत्री जन आवास योजना से जुड़ा हुआ है।
इस योजना के तहत 1536 लाभार्थियों को फ्लैट दिए जाने थे। लाभार्थियों ने योजना के अनुसार राशि भी जमा करा दी थी, लेकिन लंबे समय तक उन्हें न तो फ्लैट मिला और न ही उनकी जमा राशि वापस की गई।
मामले में पहले आयोग ने अवार्ड राशि वसूलने के लिए खसरा नंबर 1691 की जमीन को कुर्क कर दिया था।
आरोप है कि बाद में तत्कालीन एसडीएम ने बिना आयोग की अनुमति के इस कुर्क जमीन को मुक्त कर दिया और नगर परिषद ने इस जमीन के टुकड़े कर खुले बाजार में बेच दिए।
इस जमीन की बिक्री से नगर परिषद को करोड़ों रुपए की आय हुई, लेकिन इसके बावजूद न तो लाभार्थियों को उनका पैसा लौटाया गया और न ही यह राशि आयोग में जमा कराई गई।
इसी कारण उपभोक्ता आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त कार्रवाई की और अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से तलब किया।
अब प्रशासन द्वारा 6 करोड़ रुपए जमा कराने और फ्लैट जल्द सौंपने के आश्वासन के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे लाभार्थियों को जल्द राहत मिल सकेगी।
