झुंझुनूं के बाकरा में पाला सकलाय दादा का मेला 12 अप्रैल से: भजन संध्या और दंगल से सजेगा आयोजन!

Saturday, Apr 11, 2026-02:47 PM (IST)

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बाकरा गांव में लोक आस्था के प्रमुख केंद्र पाला सकलाय दादा मंदिर का दो दिवसीय वार्षिक मेला 12 अप्रैल से श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक रंगों के साथ आयोजित होने जा रहा है। इस मेले को लेकर गांव और आसपास के क्षेत्रों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

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आयोजन समिति के संयोजक सुरेश खीचड़, राजेंद्र खीचड़ और पूर्व सरपंच सतीश खीचड़ ने बताया कि मेले की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गांव को सजाया जा चुका है और ग्रामीण आयोजन को सफल बनाने के लिए पूरी तरह जुटे हुए हैं।

भजन संध्या और जागरण से होगी शुरुआत

मेले के पहले दिन 12 अप्रैल को विशाल भजन संध्या और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाएगा, जो रात 8:30 बजे से शुरू होगा। इस दौरान राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर देंगे।

भजन संध्या में बाबूलाल चौधरी, किशोर मीणा, कमलेश प्रजापत, सोनम गुर्जरी और ममता चौधरी अपनी गायकी का जादू बिखेरेंगे।

वहीं, आशा मीणा (जोधपुर), रेणु रंगीली, अंजली चौधरी और शारदा मीणा अपने आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को और भी रंगीन बनाएंगी। इस बार सोनू मारवाड़ी की विशेष प्रस्तुतियां भी जागरण का मुख्य आकर्षण रहेंगी।

दूसरे दिन होगा भव्य दंगल

मेले के दूसरे दिन 13 अप्रैल को दोपहर 3:30 बजे से भव्य कुश्ती प्रतियोगिता (दंगल) का आयोजन किया जाएगा। यह प्रतियोगिता ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ दर्शकों के लिए भी खास आकर्षण का केंद्र होगी।

इस दंगल में क्षेत्र के नामी पहलवान अपने दमखम का प्रदर्शन करेंगे, जिससे मेले का उत्साह और भी बढ़ेगा।

पुरस्कारों की घोषणा

आयोजन समिति ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले पहलवानों के लिए आकर्षक नकद पुरस्कार भी घोषित किए हैं:

  • प्रथम पुरस्कार: 11,000 रुपए
  • द्वितीय पुरस्कार: 5,100 रुपए
  • अन्य प्रतिभागियों को भी सम्मानित किया जाएगा

आस्था और संस्कृति का संगम

पाला सकलाय दादा का यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी महत्वपूर्ण आयोजन है। हर साल हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर दर्शन करते हैं और मेले का आनंद लेते हैं।

इस आयोजन के जरिए स्थानीय परंपराओं को जीवित रखने के साथ-साथ ग्रामीण कलाकारों और खिलाड़ियों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है।

कुल मिलाकर, बाकरा गांव का यह मेला आस्था, संगीत और खेल का अनूठा संगम बनकर एक बार फिर लोगों को आकर्षित करने के लिए तैयार है।


Content Editor

Payal Choudhary

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