झालावाड़ में 500 रुपये के जाली नोट छापने वाले गिरोह का भंडाफोड़, मास्टरमाइंड समेत 4 गिरफ्तार
Thursday, Feb 26, 2026-08:06 PM (IST)
राजस्थान के झालावाड़ जिले में पुलिस ने 500 रुपये के जाली नोटों की छपाई और सप्लाई करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से जाली नोट छापने में इस्तेमाल किया जा रहा लैपटॉप, प्रिंटर, प्रिंटर की स्याही और विशेष कागज जब्त किया है।
जिले के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि 500 रुपये के जाली नोटों के संबंध में थाना झालरापाटन में मुकदमा संख्या 51/2026 धारा 178, 179, 180, 181, 318(2), 61(2) बीएनएस के तहत दर्ज किया गया था। प्रारंभिक कार्रवाई थाना मनोहरथाना द्वारा की गई थी, जहां नाकाबंदी के दौरान तीन आरोपियों को भारी मात्रा में जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया गया था। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच थाना तवर को सौंपी गई।
नाकाबंदी में हुआ बड़ा खुलासा
19 फरवरी 2026 को थाना मनोहरथाना पुलिस ने डांगीपुरा जोड़ के पास नियमित नाकाबंदी के दौरान एक मोटरसाइकिल पर सवार तीन युवकों को रोका। तलाशी के दौरान उनके पास से 500-500 रुपये के बड़ी संख्या में जाली नोट बरामद हुए। पुलिस ने मौके पर ही नोट जब्त कर आरोपियों को हिरासत में ले लिया और मामला दर्ज किया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बरामद नोटों की गुणवत्ता इतनी बेहतर थी कि सामान्य व्यक्ति के लिए असली और नकली में फर्क कर पाना मुश्किल था। इसी कारण पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी जांच शुरू की।
तकनीकी जांच से पकड़ा गया मास्टरमाइंड
थाना जावर के थानाधिकारी कृष्ण गोपाल (आरपीएस प्रशिक्षु) के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने सूचना संकलन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और तकनीकी अनुसंधान के आधार पर गिरोह के नेटवर्क का खुलासा किया। जांच के दौरान अर्जुन उर्फ कमलेश, जगदीश तंवर और मोहन तंवर को अकलेरा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि गिरोह का मास्टरमाइंड मदन चौहान है, जो दिल्ली में रहकर जाली नोटों की छपाई कर रहा था। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 23 फरवरी को नई दिल्ली से मदन चौहान को गिरफ्तार कर लिया।
दिल्ली से संचालित हो रहा था नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया कि मदन चौहान दिल्ली में किराए के मकान में रहकर जाली नोट छापने का काम कर रहा था। उसके कब्जे से एक लैपटॉप, हाई क्वालिटी प्रिंटर, प्रिंटर की स्याही और नोट छापने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा विशेष कागज बरामद किया गया है।
प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि जाली नोटों की सप्लाई केवल झालावाड़ जिले तक सीमित नहीं थी, बल्कि आसपास के अन्य जिलों में भी की जा रही थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं तथा अब तक कितनी राशि के जाली नोट बाजार में खपाए जा चुके हैं।
संगठित तरीके से करते थे सप्लाई
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। छोटे व्यापारियों, ग्रामीण बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों को टारगेट कर जाली नोट चलाए जा रहे थे, ताकि पकड़ में आने की संभावना कम रहे। आरोपी मोटरसाइकिल के जरिए अलग-अलग इलाकों में जाकर नोट खपाते थे।
जिले में हाल ही में 500 रुपये के संदिग्ध नोट मिलने की कुछ शिकायतें भी सामने आई थीं, जिसके बाद पुलिस पहले से सतर्क थी। नाकाबंदी के दौरान हुई इस कार्रवाई ने पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया।
आगे की जांच जारी
पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि मामले की गहन जांच जारी है। आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संभावित साथियों और सप्लाई चेन की कड़ियों की तलाश की जा रही है। साथ ही बरामद डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नोटों की डिजाइन और प्रिंटिंग तकनीक कहां से हासिल की गई।
फिलहाल चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से जिले में जाली नोटों के नेटवर्क पर बड़ा प्रहार हुआ है।
