झालावाड़ में किसानों को सिखाई गई जलवायु स्मार्ट खेती: ‘किसान खेत दिवस’ में आधुनिक तकनीकों की दी जानकारी!
Saturday, Mar 14, 2026-06:49 PM (IST)
जिले में किसानों को बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों के अनुसार खेती करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसी कड़ी में आईटीसी लिमिटेड के ‘मिशन सुनहरा कल’ कार्यक्रम के तहत क्लाइमेट स्मार्ट विलेज पहल के अंतर्गत बकानी क्षेत्र के मोलक्या कलां गांव में ‘किसान खेत दिवस’ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को जलवायु परिवर्तन के अनुरूप आधुनिक और टिकाऊ खेती की तकनीकों के बारे में जानकारी देना था। कार्यक्रम में आसपास के गांवों से आए करीब 73 किसानों ने भाग लिया।
किसानों को दी गई जलवायु स्मार्ट खेती की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान कृषि विशेषज्ञ Satyanarayan Patidar ने किसानों को जलवायु स्मार्ट खेती के विभिन्न पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के कारण किसानों को खेती के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाना जरूरी है। इसके तहत किसानों को ज्ञान संवर्धन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और आजीविका बढ़ाने के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे खेती के साथ-साथ बागवानी, पशुपालन और विभिन्न सरकारी व संस्थागत योजनाओं से जुड़कर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
आईटीसी की योजनाओं और तकनीक की जानकारी
कार्यक्रम में किसानों को आईटीसी की गेहूं खरीद प्रक्रिया, बायोगैस तकनीक और ITC Mars ऐप के उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। बताया गया कि इस ऐप के माध्यम से किसान मौसम की जानकारी, बाजार भाव और खेती से जुड़ी तकनीकी सलाह आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
सरकारी योजनाओं से अवगत कराया
कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक Rajendra Kumar ने किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने किसानों को गोवर्द्धन जैविक वर्मी कम्पोस्ट योजना, तारबंदी योजना, पाइपलाइन योजना, खेत तलाई योजना और कृषि यंत्र अनुदान योजना के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने किसानों से इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए समय पर आवेदन करने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि जिले में गोवर्द्धन जैविक वर्मी कम्पोस्ट योजना के लिए सबसे अधिक आवेदन बकानी पंचायत समिति से प्राप्त हुए हैं।
मृदा स्वास्थ्य कार्ड की जानकारी
इस मौके पर करलगांव के प्रशासक Raisingh Lodha ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड के जरिए किसान अपनी जमीन की गुणवत्ता समझकर उचित खाद और उर्वरक का उपयोग कर सकते हैं।
डेमो प्लॉट में बेहतर उत्पादन का परिणाम
कार्यक्रम के दौरान किसानों को खेतों में लगाए गए डेमो प्लॉट का भी प्रदर्शन कराया गया। इसमें स्थायी चौड़ी नाली पद्धति से की गई खेती और पारंपरिक खेती के बीच तुलनात्मक विश्लेषण किया गया।
विश्लेषण में पाया गया कि डेमो प्लॉट में पौधों की संख्या, गेहूं की बाली की लंबाई, 1000 दानों का वजन और प्रति वर्ग मीटर उत्पादन पारंपरिक खेती की तुलना में बेहतर रहा।
परिणामों के अनुसार इस पद्धति से करीब 8 से 10 प्रतिशत अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ।
बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
कार्यक्रम में बालू सिंह, भगवान, बलराम, केवलचंद लोधा सहित कई प्रगतिशील किसान मौजूद रहे। किसानों ने कार्यक्रम में रुचि दिखाते हुए नई तकनीकों को अपनाने की इच्छा भी जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम किसानों को आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो सकती है।
