कुरुक्षेत्र में हुआ संस्कृति, परंपरा और भारतीय सभ्यता का उत्सव: चतुर्वेद पारायण महायज्ञ आयोजित

Thursday, Feb 12, 2026-03:17 PM (IST)

डीडवाना। हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पीपली में महर्षि दयानंद सरस्वती एवं स्वामी श्रद्धानंद जी बलिदान शताब्दी वर्ष के शुभारंभ पर 12 दिवसीय चतुर्वेद पारायण महायज्ञ आयोजित हुआ। इस आयोजन में वर्ल्ड पीस हार्मनी राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने भी शिरकत की।

 

इस दौरान कार्यक्रम संयोजक स्वामी संपूर्णानंद जी सरस्वती, सुभाष सुधा जी (पूर्व राज्य मंत्री हरियाणा), उस्ताद डॉ. मुजतबा हुसैन (अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बांसुरी वादक), आलोक कुमार (अध्यक्ष, अन्तरराष्ट्रीय विश्व हिन्दू परिषद) अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा अनेक संत महात्माओं, विद्वान जनों तथा श्रद्धालु भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में हरियाणा के साथ ही अनेक राज्यों से धर्मप्रेमी ओर भक्तजन भी पहुंचे, जिससे यह कार्यक्रम धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि संस्कृति, परंपरा और भारतीय सभ्यता के उत्सव में बदल गया।

 

इस मौके पर वर्ल्ड पीस हार्मनी के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने सम्बोधित करते हुए कहा कि मैं खुशनसीब हूं, जिसे महर्षि दयानंद सरस्वती जी की जयंती जैसे पवित्र अवसर पर अपने विचार रखने का अवसर मिला। मैं धर्म से मुस्लिम हूं, लेकिन उससे पहले मैं इस देश का नागरिक हूं, और हम सबकी पहचान सबसे पहले इंसानियत से होती है।

 

आजाद ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने समाज को जागरूक करने का काम किया। उन्होंने वेदों की ओर लौटने का संदेश दिया, अंधविश्वासों के खिलाफ आवाज उठाई और शिक्षा, विशेषकर नारी शिक्षा पर ज़ोर दिया। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि धर्म का असली अर्थ है – सत्य, नैतिकता और मानव कल्याण।

 

आजाद ने कहा कि सनातन धर्म की जो मूल भावना “वसुधैव कुटुम्बकम्” की है। यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। यही बात इस्लाम भी सिखाता है कि पूरी इंसानियत एक परिवार की तरह है और हमें आपस में प्रेम, भाईचारा और सम्मान बनाए रखना चाहिए। जब हम इन मूल्यों को देखते हैं तो महसूस होता है कि अलग-अलग रास्ते हो सकते हैं, लेकिन मंज़िल सबकी एक ही है — अच्छाई, शांति और इंसानियत।

 

महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने समाज सुधार के लिए जो संघर्ष किया, वह किसी एक समाज के लिए नहीं था, बल्कि पूरे देश और मानवता के लिए था। उन्होंने शिक्षा को ताकत माना और ज्ञान को सबसे बड़ा प्रकाश बताया। आज के समय में हमें भी उसी प्रकाश को आगे बढ़ाना है — बच्चों को अच्छी शिक्षा देना, समाज से बुराइयों को दूर करना और आपसी सौहार्द बनाए रखना। गुलाम नबी आजाद ने कहा कि आज जब हम उनकी जयंती मना रहे हैं और 12 दिवसीय चतुर्वेद पारायण महायज्ञ जैसे भव्य आयोजन में एकत्रित हुए हैं, तो यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, हमारी परंपरा और हमारे मूल्यों का उत्सव है।

 

आजाद ने कहा कि मैं दिल से यही दुआ करता हूं कि हमारे देश में हमेशा आपसी भाईचारा बना रहे। हम एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करें, एक-दूसरे की भावनाओं को समझें और मिलकर देश को आगे बढ़ाएं। साथ हम सबको मिलकर यह संकल्प लेना होगा कि हम सत्य, शिक्षा, सद्भाव और इंसानियत के रास्ते पर चलेंगे। यही महर्षि दयानंद जी के विचारों का सच्चा सम्मान होगा।


Content Editor

Anil Jangid

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