एमके टॉक्स बना पावरफुल प्लेटफॉर्म, देश के बड़े चेहरे मोहसिन खान के साथ

Sunday, Jul 12, 2026-10:52 AM (IST)

नई दिल्ली। डिजिटल युग के इस तेजी से बदलते दौर में जहां पारंपरिक मीडिया—अखबार, टीवी और रेडियो—अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं पॉडकास्ट एक सशक्त माध्यम के रूप में उभरकर सामने आया है। आज देश के शीर्ष राजनेता, फिल्मी सितारे और खेल जगत के बड़े नाम पारंपरिक इंटरव्यू प्लेटफॉर्म्स के बजाय लोकप्रिय पॉडकास्ट शो का रुख कर रहे हैं।

 

इसी बदलते मीडिया परिदृश्य में एक नाम तेजी से उभरा है। अपने आकर्षक व्यक्तित्व और सटीक संवाद शैली के चलते मोहसिन ने बेहद कम समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक अलग पहचान स्थापित की है। मुंबई और दिल्ली दोनों जगह सक्रिय मोहसिन खान से हाल ही में मुलाकात के दौरान उनके करियर और सोच को करीब से समझने का अवसर मिला।

 

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी बॉलीवुड में करियर बनाने के बारे में सोचा, तो मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, “हर व्यक्ति जानता है कि वह किस क्षेत्र में बेहतर कर सकता है। मैंने पढ़ाई के बाद ही तय कर लिया था कि मुझे पत्रकारिता में जाना है।” दोस्तों द्वारा एक्टिंग में आने के सुझावों को उन्होंने हमेशा सहजता से टाल दिया।

 

मोहसिन का मानना है कि किसी भी क्षेत्र में सफलता संयोग से नहीं मिलती, बल्कि समर्पण और निरंतर मेहनत से हासिल होती है। यूनाइटेड किंगडम से शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने भारत लौटकर पत्रकारिता में कदम रखा और एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार चैनल में लगभग एक दशक तक संपादकीय, एंकरिंग और प्रबंधन की अहम जिम्मेदारियां निभाईं। उनके द्वारा होस्ट किया गया शो ‘जिंदगी’ दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा और टीआरपी के नए कीर्तिमान स्थापित किए।

 

लंबे समय तक टीवी में काम करने के बाद उन्होंने डिजिटल दुनिया की ओर रुख किया और ‘एमके टॉक्स’ की शुरुआत की। यह शो जल्द ही जेन एक्स से लेकर जेन जेड तक के दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो गया। मोहसिन की तैयारी, गहन रिसर्च और मेहमानों से सहज लेकिन पैनी बातचीत उनके शो की सबसे बड़ी ताकत बन गई।

 

‘एमके टॉक्स’ की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें देश के प्रमुख राजनेता, फिल्मी सितारे और खेल जगत के दिग्गज शामिल हो चुके हैं। इनमें पप्पू यादव, चिराग पासवान, राम गोपाल यादव, संजय सिंह और मनोज तिवारी जैसे राजनीतिक चेहरे, वहीं मनोरंजन जगत से एकता कपूर, भूमि पेडनेकर, कैनात अरोड़ा, एजाज खान और संग्राम सिंह जैसे नाम शामिल हैं। क्रिकेटर अमित मिश्रा और मोहित शर्मा सहित कई पेशेवर भी इस मंच का हिस्सा बन चुके हैं।

 

मोहसिन बताते हैं कि कई बार मेहमान सीमित समय लेकर आते हैं, लेकिन बातचीत के प्रवाह में इंटरव्यू घंटों तक चल जाता है। उन्होंने विशेष रूप से सुब्रमण्यम स्वामी के साथ हुई बातचीत को चुनौतीपूर्ण बताया, जहां कठिन सवालों के बावजूद संवाद संतुलित और सार्थक बना रहा।

 

हाल ही में ‘एमके टॉक्स’ में बातचीत के दौरान एकता कपूर ने अपने करियर और इंडस्ट्री को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा कीं। उन्होंने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ इतनी बड़ी सफलता हासिल करेगा। दर्शकों से मिला प्यार मेरी कल्पना से कहीं बढ़कर था।”

 

उन्होंने आगे कहा, “टैलेंट पहचानने के मामले में मैं हमेशा अपनी सहज समझ (इंट्यूशन) पर भरोसा करती हूँ और मेरा मानना है कि मजबूत महिला किरदारों पर आधारित कहानियाँ सबसे ज्यादा असर छोड़ती हैं।”

 

टेलीविजन और फिल्मों के अंतर पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “टेलीविज़न आपको दर्शकों के साथ गहरा भावनात्मक रिश्ता बनाने का अवसर देता है, जबकि फिल्में आपकी कहानी को कहीं बड़े स्तर पर लोगों तक पहुँचाती हैं।”

 

प्यार जैसे विषय पर एकता कपूर ने कहा, “प्यार एक बेहद जटिल लेकिन ज़रूरी भावना है, और यही वजह है कि यह मेरी लगभग हर कहानी का अहम हिस्सा बन जाता है।” वहीं बॉलीवुड को लेकर धारणाओं पर उन्होंने साफ कहा, “लोग अक्सर बॉलीवुड पार्टियों को लेकर गलत धारणाएँ बना लेते हैं। असलियत वैसी नहीं होती जैसी आम तौर पर समझी जाती है।” इसी तरह से जब भूमि पेडनेकर इंटरव्यू के लिए आई तो उन्होंने खुलकर बताया कि कैसे उन्होंने 40 किलो वजन बढ़ाकर फिल्म में रोल पाया था

 

मोहसिन बताते हैं कि कई बार मेहमान सीमित समय लेकर आते हैं, लेकिन बातचीत के प्रवाह में इंटरव्यू घंटों तक चल जाता है। उन्होंने विशेष रूप से के साथ हुई बातचीत को चुनौतीपूर्ण बताया, जहां कठिन सवालों के बावजूद संवाद संतुलित और सार्थक बना रहा।
‘एमके टॉक्स’ अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना चुका है। हॉलीवुड अभिनेता के साथ उनकी बातचीत को खासा सराहा गया। बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद मोहसिन खुद को आज भी एक विद्यार्थी मानते हैं। उनका कहना है, “जिंदगी रुकने का नाम नहीं है, यह लगातार सीखते रहने की प्रक्रिया है—और यही आपको आम से खास बनाती है।”

 

मोहसिन खान की यह यात्रा न केवल बदलते मीडिया परिदृश्य की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समय के साथ खुद को ढालना ही सफलता की असली कुंजी है।


Content Editor

Anil Jangid

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