रायसर के धोरों में उतरा ग्रामीण जोश: अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 2026 के तीसरे दिन खेल, रोमांच और संस्कृति का संगम
Monday, Jan 12, 2026-01:41 PM (IST)
बीकानेर। अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव 2026 का तीसरा और अंतिम दिन पूरी तरह से ग्रामीण परंपराओं, साहसिक गतिविधियों और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के नाम रहा। रविवार सुबह से ही रायसर के रेतीले धोरों में देशी-विदेशी पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। उत्सव स्थल पर पारंपरिक खेल, मरुस्थलीय अनुभव और लोकसंस्कृति ने पर्यटकों को राजस्थान की आत्मा से रूबरू कराया।
रायसर के धोरों पर आयोजित “दम-खम ग्रामीण खेल प्रतियोगिताओं” में रस्साकशी, कुश्ती, कबड्डी और खो-खो जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताएं हुईं। ग्रामीण खिलाड़ियों के साथ-साथ विदेशी पर्यटकों ने भी इन खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे माहौल और अधिक जीवंत हो गया। महिलाओं की मटका दौड़ और भारतीय-विदेशी पर्यटकों के बीच रेस ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
इसके साथ ही एडवेंचर और डेजर्ट एक्सपीरियंस गतिविधियों ने खास आकर्षण पैदा किया। ऊंट व ऊंटगाड़ी सफारी, घोड़ा और ऊंट दौड़, हस्तशिल्प व फूड बाजार, साथ ही भारतीय परंपराओं में विदेशी पर्यटकों का प्रतीकात्मक विवाह कार्यक्रम ने उत्सव को यादगार बना दिया। पर्यटकों ने मरुस्थलीय जीवन, खान-पान और लोकसंस्कृति को नजदीक से अनुभव किया।
शाम को रायसर सैंड ड्यून्स पर “रंगीला राजस्थान” सांस्कृतिक संध्या का आयोजन हुआ, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने लोकनृत्य और संगीत की शानदार प्रस्तुतियां दीं। जसनाथी संप्रदाय का अग्नि नृत्य कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऊंट उत्सव का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि राजस्थान की ग्रामीण परंपराएं, लोकखेल और सांस्कृतिक विरासत आज भी वैश्विक मंच पर लोगों को आकर्षित करने की पूरी क्षमता रखती हैं।
