कांग्रेस ने मनरेगा को बनाया भ्रष्टाचार का ''एटीएम'', मोदी सरकार ने वीबी जी राम जी से लगाया ''डिजिटल ताला''
Friday, Jan 23, 2026-05:36 PM (IST)
भीलवाड़ा। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने भाजपा जिला कार्यालय पर आयोजित एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कांग्रेस पार्टी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिस कांग्रेस ने दशकों तक देश की संपत्तियों और योजनाओं को केवल 'एक परिवार' के नाम की जागीर समझा, आज उसे 'विकसित भारत' और 'जी राम जी' के नाम से दर्द हो रहा है। यह विधेयक महात्मा गांधी की सोच के अनुरूप और देश के गरीब कल्याण के संकल्प को सिद्ध करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास का नया ढांचा खड़ा करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने मनरेगा को 'भ्रष्टाचारियों की एटीएम' बना दिया था, मोदी सरकार ने 11 साल में उसे 'मजदूरों की तिजोरी' बना दिया और अब 'जी राम जी' विधेयक उस पर 'डिजिटल ताला' है।
प्रेस वार्ता के दौरान जिला प्रभारी संजय जैन ताऊ, जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा, विधायक गोपाल खंडेलवाल, जब्बर सिंह सांखला, लादूलाल पीतलिया, लालाराम बैरवा, वीबी जीरामजी जिला संयोजक बाबूलाल आचार्य, जिला प्रवक्ता अंकुर बोरदिया भी मंचासीन रहे।
कांग्रेस ने 600 से ज्यादा नाम परिवार आधारित रखे
प्रदेश महामंत्री बगड़ी ने आगे कहा कि उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकारों ने देश के लगभग 600 संस्थानों, पुरस्कारों और योजनाओं के नाम केवल नेहरू-गांधी परिवार के नाम पर रखे। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री मोदी ने ‘राजभवन’ को ‘लोकभावन’, 'राजपथ' को 'कर्तव्य पथ', ‘रेसकोर्स रोड’ को ‘लोक कल्याण मार्ग’ और प्रधानमंत्री कार्यालय को 'सेवा तीर्थ' बनाकर व्यक्ति पूजा की जगह सेवा की राजनीति स्थापित की है।
भ्रष्टाचार कारण बना मनरेगा की विफलता का
प्रेस वार्ता में बगड़ी ने आंकड़े रखते हुए कहा कि मनरेगा भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया था। अकेले 2024-25 में 193.67 करोड़ रुपये का गबन हुआ। कांग्रेस सिर्फ आरोप लगाती है, लेकिन सच यह है कि मनरेगा पर अब तक हुए कुल 11.74 लाख करोड़ रुपये के खर्च में से 8.53 लाख करोड़ रुपये अकेले मोदी सरकार ने खर्च किए हैं।
वीबी जी राम जी 2047 के विकसित भारत की नींव
बगड़ी ने बताया कि वीबी जी राम जी विधेयक सेअब ग्रामीण परिवारों को 100 के बजाय 125 दिन का काम मिलेगा, जिससे उनकी आय में 25% की सीधी वृद्धि होगी। वन क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति कामगारों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार (कुल 150 दिन) मिलेगा। मजदूरों को 15 दिन इंतज़ार नहीं करना होगा, उन्हें हर हफ्ते पेमेंट दिया जाएगा। भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए एआई, जीपीएस और बायोमेट्रिक सत्यापन का उपयोग होगा। अब 'बिचौलियों' का धंधा बंद होगा। बुआई और कटाई के समय श्रमिकों की कमी न हो, इसके लिए 60 दिनों की 'नो वर्क' अवधि का प्रावधान किया गया है। केवल गड्ढे खोदने के बजाय अब 'जल सुरक्षा', ग्रामीण सड़कों और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे साहिर आजीविका ढांचे पर ध्यान दिया जाएगा।
60 और 40 के रेशियों से राज्यों की जवाबदेही बढ़ेगी
विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करते हुए बगड़ी ने कहा कि इस योजना को 'केंद्र प्रायोजित' (60:40 अनुपात) बनाकर मोदी सरकार ने राज्यों के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाई है इससे राज्यों की जवाबदेही बढ़ेगी। प्रेसवार्ता के दौरान जिला प्रवक्ता मनोज बुलानी, शशांक बिड़ला, अभिश्रुता सोलंकी, अनिल सिंह जादौन, सोशल मीडिया जिला संयोजक रागिनी गुप्ता, सहसंयोजक महेंद्र नायक भी उपस्थित रहे।
