आनंद ही परमात्मा का अंतिम स्वरूप है: राष्ट्रीय संत गोविंददेव गिरी

Wednesday, Jan 07, 2026-03:48 PM (IST)

बारां। बारां में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन राष्ट्रीय संत गोविंददेव गिरी महाराज ने आध्यात्मिक विचारों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। एनएच-27 बारां बायपास स्थित होटल द्वारिका परिसर में चल रही कथा में उन्होंने कहा कि संसार में जिसने भी परमात्मा का साक्षात्कार किया, उसका अनुभव एक ही वाक्य में समाया है— आनंद ही परमात्मा का अंतिम स्वरूप है।

 

महाराज ने देवर्षि नारद और महर्षि व्यास के संवाद का मार्मिक वर्णन करते हुए बताया कि आत्मसाक्षात्कार तभी संभव है जब जीवन में शुद्धता हो। उन्होंने कहा कि परमात्मा उस व्यक्ति से दूर रहते हैं, जिसके जीवन में दोष और अशुद्धि होती है। कथा के दौरान शीतलहर और कड़ाके की सर्दी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और भक्तिरस में डूबे रहे।

 

गोविंददेव गिरी महाराज ने श्रीमद्भागवत को अलौकिक ग्रंथ बताते हुए कहा कि इसकी रचना महर्षि व्यास ने समाधि अवस्था में साक्षात श्रीकृष्ण की लीलाओं का दर्शन कर की थी। उन्होंने विज्ञान और अध्यात्म की तुलना करते हुए कहा कि जहां विज्ञान निरीक्षण, गणना और प्रयोग पर आधारित है, वहीं अध्यात्म ध्यान और साधना से सत्य तक पहुंचता है।

 

कथा के दौरान “राधे-राधे गोविंद बोलो रे” जैसे भजनों ने पांडाल को भक्तिरस से भर दिया। श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर भजनों में झूमते नजर आए। इससे पूर्व साबू परिवार द्वारा व्यासपीठ पूजन कर महाराज का स्वागत किया गया।

 

आयोजक विष्णु साबू ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 1.30 से शाम 5 बजे तक तथा रविवार को सुबह 9.30 से दोपहर 1 बजे तक होगी। कथा 11 जनवरी तक चलेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निशुल्क बसों की व्यवस्था भी की गई है।


Content Editor

Anil Jangid

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