बावरिया बांध के पेटे में पावर ग्रिड की तैयारी पर विवाद, जल संसाधन विभाग ने नहीं दी एनओसी
Tuesday, Feb 24, 2026-04:12 PM (IST)
अलवर। बावरिया बांध के पेटे में पावर ग्रिड स्टेशन स्थापित करने की तैयारी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। एक निजी कंपनी ने अब तक करीब 80 बीघा जमीन खरीद ली है और लगभग 320 बीघा भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। मौके पर बिजली उपकरण भी पहुंचने लगे हैं।
हालांकि, जल संसाधन विभाग (सिंचाई विभाग) ने स्पष्ट किया है कि इस परियोजना के लिए अब तक कोई एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) जारी नहीं की गई है। विभाग का कहना है कि खातेदारी जमीन की खरीद-फरोख्त संभव है, लेकिन बांध के पेटे या कैचमेंट एरिया में स्थायी निर्माण, चारदीवारी या व्यावसायिक गतिविधियां नियमों के विरुद्ध हैं। विभागीय टीम द्वारा मौके का निरीक्षण किया जाएगा और संबंधित बिजली निगम को नोटिस देने की तैयारी है।
10 किलोमीटर क्षेत्र को मिलता है लाभ
बांध भरने के बाद आसपास करीब 10 किलोमीटर के दायरे में भूजल स्तर बढ़ता है, जिससे किसानों को सिंचाई में सीधा फायदा होता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कैचमेंट एरिया में निर्माण हुआ तो वर्षा का पानी बांध तक सुचारू रूप से नहीं पहुंच पाएगा। इससे जलभराव क्षमता घटने और भूजल रिचार्ज कम होने की आशंका है।
ग्रामीणों का विरोध
बांध से जुड़े पांच गांवों के ग्रामीणों ने परियोजना का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि एक ओर सरकार जल संरक्षण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर कैचमेंट क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति देना विरोधाभासी है। ग्रामीणों ने मामले को जयपुर स्तर तक उठाने की चेतावनी दी है।
बांध क्षेत्र के नियम
पेटे व कैचमेंट क्षेत्र में ऐसा कोई निर्माण नहीं हो सकता जिससे जल संग्रहण क्षमता या जल प्रवाह प्रभावित हो।
स्थायी भवन निर्माण प्रतिबंधित है।
चारदीवारी और व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक है।
भू-उपयोग परिवर्तन के लिए विभागीय अनुमति अनिवार्य है।
संभावित नुकसान
कैचमेंट एरिया कम होने से जलधारण क्षमता में कमी
भूजल रिचार्ज घटने की आशंका
हाईटेंशन लाइनों से फसलों को खतरा
भविष्य की सिंचाई परियोजनाओं पर असर
फैक्ट फाइल
निर्माण: स्टेट टाइम
कुल क्षेत्रफल: 2900.36 हेक्टेयर
खेती योग्य क्षेत्र: 1852 हेक्टेयर
भराव क्षमता: 196 एमसीएफटी
बांध की गहराई: 10 फीट
फिलहाल परियोजना को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन विभागीय कार्रवाई और ग्रामीणों के विरोध के चलते मामला तूल पकड़ता नजर आ रहा है।
