नशा, पिस्टल और सस्पेंशन: केकड़ी ASI मामला बना सियासी बारूद, एसपी वंदिता राणा ने दी स्थिति की स्पष्टता
Wednesday, Jan 07, 2026-03:39 PM (IST)
अजमेर। केकड़ी सदर थाना में तैनात हेड कांस्टेबल/एएसआई राजेश मीणा के निलंबन का मामला अब केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बनता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण पर अजमेर जिला पुलिस अधीक्षक वंदिता राणा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस घटना का अवैध खनन से कोई भी संबंध नहीं है और न ही उस दिन खनन को लेकर किसी तरह की पुलिस कार्रवाई की गई थी।
7 जनवरी 2026 को एसपी वंदिता राणा ने एसपी कार्यालय कक्ष में पंजाब केसरी से ऑफ कैमरा बातचीत में कहा कि यह मामला पूरी तरह से पुलिस आचरण और अनुशासन से जुड़ा है। एसपी के अनुसार 5 जनवरी को एएसआई राजेश मीणा केकड़ी सदर थाना में ड्यूटी ऑफिसर के रूप में तैनात थे। इसी दौरान वह कथित रूप से नशे की हालत में पाए गए। आरोप है कि उन्होंने एक सिविलियन को सरकारी पिस्टल दिखाकर धमकाया, उसके साथ मारपीट की और अशोभनीय व्यवहार किया।
एसपी वंदिता राणा ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम की तथ्यों के आधार पर जांच की गई। जांच में सामने आए तथ्यों और विभागीय नियमों के तहत एएसआई राजेश मीणा को निलंबित किया गया है। उन्होंने दो टूक कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोपरि है और चाहे पुलिसकर्मी हो या आम नागरिक, नशे की हालत में कानून हाथ में लेने पर कार्रवाई तय है। इस मामले में किसी प्रकार का दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया गया है।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद मामला सियासी रंग ले चुका है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एएसआई राजेश मीणा का एक वीडियो पोस्ट किया। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा नेताओं और कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर अवैध खनन को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप लगाए। डोटासरा का दावा है कि राजेश मीणा का निलंबन अवैध खनन से जुड़े मामलों को दबाने की कोशिश का हिस्सा है।
डोटासरा के बयान और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे सत्ता और प्रशासन की मिलीभगत बता रहा है, वहीं पुलिस प्रशासन साफ तौर पर इसे एक अनुशासनहीनता और आपराधिक आचरण का मामला बता रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।
फिलहाल एएसआई राजेश मीणा निलंबित हैं और विभागीय जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। वहीं दूसरी ओर यह मामला अब कानून-व्यवस्था से आगे बढ़कर राजनीतिक टकराव का रूप लेता नजर आ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच के निष्कर्ष क्या सामने आते हैं और सियासी आरोपों का इस प्रकरण पर क्या असर पड़ता है।
