अजमेर के कॉलेज प्रिंसिपल का विवादित बयान: पाकिस्तान को बताया बड़ा भाई, गांधी-जिन्ना-अंबेडकर पर कही ये बातें
Monday, Jan 26, 2026-01:10 PM (IST)
अजमेर। अजमेर के सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के प्रिंसिपल मनोज बेहरवाल के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने पाकिस्तान को भारत का “बड़ा भाई” बताते हुए आज़ादी के समय के घटनाक्रम, साथ ही महात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना और डॉ. भीमराव अंबेडकर को लेकर कई टिप्पणियां कीं।
यह बयान 23 और 24 जनवरी को ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में आयोजित राजस्थान सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की 31वीं अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया गया। 24 जनवरी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधन करते हुए बेहरवाल ने कहा कि 14 अगस्त 1947 को सबसे पहले पाकिस्तान अस्तित्व में आया, जबकि 15 अगस्त की सुबह भारत का उदय हुआ। इस आधार पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत से लगभग 12 घंटे “बड़ा” है और इसलिए वह हमारा बड़ा भाई है।
बेहरवाल ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि आज़ादी के समय देश में केवल तीन प्रमुख नेता थे—महात्मा गांधी, मोहम्मद अली जिन्ना और डॉ. भीमराव अंबेडकर। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उस समय विदेशी पत्रकारों ने सबसे पहले गांधी से मिलने की कोशिश की, लेकिन वे सो चुके थे। इसके बाद जिन्ना से मिलने का प्रयास हुआ, पर वे भी उपलब्ध नहीं थे। अंत में पत्रकार डॉ. अंबेडकर के पास पहुंचे, जो देर रात तक हिंदू कोड बिल की तैयारी में लगे थे। इस पर अंबेडकर के कथित कथन का हवाला देते हुए बेहरवाल ने कहा कि “उन दोनों का समाज जाग चुका था, इसलिए वे सो गए, जबकि मेरा समाज अभी सो रहा है, इसलिए मुझे जागना पड़ रहा है।”
अपने भाषण में बेहरवाल ने पाकिस्तान को लेकर कहा कि विभाजन के बाद पाकिस्तान ने पहले स्वयं को इस्लामिक राष्ट्र घोषित किया और बाद में भारत से मिले 45 करोड़ रुपये का उपयोग गलत दिशा में किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस धन का उपयोग आतंकवाद को बढ़ावा देने में किया गया।
राजनीति और समाज के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए प्रिंसिपल ने कहा कि 2014 के बाद पहली बार भारतीय राजनीति और समाज का भारतीय ज्ञान परंपरा से सीधा संबंध बना है। इससे पहले राजनीति समाज को तोड़ने का काम करती रही, जिससे समाज भ्रमित रहा।
कॉन्फ्रेंस में भारत के सात राज्यों और राजस्थान के 20 से अधिक जिलों के प्रतिभागियों के साथ-साथ तीन देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि सीए अंकुर गोयल रहे, मुख्य वक्ता राजस्थान विश्वविद्यालय के प्रो. एम. एल. शर्मा थे। अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. रेखा मंडोवरा ने की, जबकि संचालन प्रोफेसर हरीश कुमार और श्वेता स्वामी ने किया।
